लंपी महामारी में कांग्रेस सरकार असंवेदनशील, 2023 में भुगतेगी खामियाजा: प्रदेशाध्यक्ष पूनिया

नीमकाथाना: राजस्थान सरकार लंपी बीमारी के दौरान गौवंश की रक्षा करने में नाकाम रही। राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने अपनी असंवेदनशीलता का परिचय देते हुए लंपी बीमारी के दौरान गौवंश को बचाने के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाया। नतीजतन राजस्थान में हजारों की संख्या में गौवंश की दर्दनाक मौत हो गई। ऐसी सरकार का निश्चित ही 2023 में स्थायी श्राद्ध हो जाएगा। राजस्थान में वर्तमान राज्य सरकार को गौ माता का श्राप लगेगा। 

यह बात भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने नीमकाथाना में आयोजित शहीद होशियार सिंह सामोता की 21वीं पुण्यतिथि के कार्यक्रम के दौरान पत्रकार वार्ता में कही। कार्यक्रम में सीकर सांसद स्वामी सुमेधानंद व पूर्व राज्य मंत्री प्रेम सिंह बाजोर, भाजपा जिलाध्यक्ष इन्द्रा गिठाला सहित दिग्गज भाजपा नेता पहुंचे। 

कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने देशभर में फैली लंपी बीमारी का जिक्र करते हुए कहा कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात की सरकारों ने लंपी महामारी के दौरान गौवंश की रक्षा के लिए उचित प्रबंधन किए। जिसके कारण वहां गोवंश की मृत्युदर कम रही। 

ठीक इसके विपरीत राजस्थान में लंपी महामारी के दौरान गौवंश की मृत्यु दर लगातार बढ़ती जा रही है। जो कि चिंताजनक है। ऐसी विकट स्थिति में कांग्रेस सरकार धरातल पर कार्य न करते हुए वर्चुअल बैठकें करने व चिट्ठी प्रणाली पर विश्वास जता रही है। जिसका दुष्प्रभाव यह रहा कि राजस्थान में गौवंश की लगातार दर्दनाक मौत हो रही है।

पूनिया ने कहा कि राज्य सरकार लंपी बीमारी को राज्य आपदा न मानकर केंद्र सरकार पर दबाव डालते राष्ट्रीय आपदा घोषित करवाने में लगी हुई है। लंपी बीमारी के दौरान राजस्थान में भाजपा ने राज्य के सभी जिलो में 'गौवंश बचाओ' के नारों के साथ ज्ञापन दिए हैं।

राजस्थान सरकार पशु चिकित्सकों की भर्ती, अस्थायी पशु चिकित्सकों की भर्ती, गोटपॉक्स वैक्सीन के टीकाकरण  व उचित संख्या में आइसोलेशन सेंटर बनाने में नाकाम रही। जिसका खामियाजा कांग्रेस सरकार को राजस्थान में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भुगतना होगा।
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