कोविड महामारी के बाद शहरी क्षेत्र की स्कूलों में 60 प्रतिशत तक रही बच्चो की उपस्थिति, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ने किया बंटाधार

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नीमकाथाना न्यूज टीम की स्पेशल स्टोरी
नीमकाथाना। कोविड-19 महामारी की वजह से लंबे अरसे तक बंद रहने के बाद राजस्थान में सभी स्कूलों को खोल दिया गया है। कक्षा 10वीं से 12वीं तक के स्कूलों को 1 फरवरी से तो वहीं कक्षा 6 से 8वीं तक की स्कूलों को 10 फरवरी से व कक्षा 1 से 5 वीं तक स्कूलों को 16 फरवरी से खोल दिया गया है। नीमकाथाना शहरी क्षेत्र में स्कूलों में उपस्थिति 60 प्रतिशत तक रही। शत-प्रतिशत विधार्थी कक्षाओं में उपस्थित नहीं हुए।
परिवहन व्यवस्था भी अनुपस्थिति की वजह
कोविड-19 के बाद शहरी क्षेत्र में स्कूलों में 40 प्रतिशत विद्यार्थियों की अनुपस्थिति रही है। इसमें परिवहन व्यवस्था भी एक वजह है। दूर-दराज गांवों में रहने वाले विद्यार्थी परिवहन के अभाव में शहर में स्थित विद्यालयों में नहीं आ पा रहे हैं जहां उनका नामांकन दर्ज है।

अभिभावक सतर्क
कोविड-19 की तीसरी लहर में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ऐसे में अभिभावक चिंतित है। वे सतर्कता बरतते हुए कह रहे हैं कि अगले सत्र से अपने बच्चों को स्कूलों में भेजेंगे।

बच्चों की सीखने की इच्छा पर पड़ा विपरीत असर
शहर में स्थित गजानंद मोदी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य रमेश चन्द यादव ने बताया कि 2 साल से चल रही कोविड-19 महामारी की वजह से स्कूलों के बंद होने से विद्यार्थियों की सीखने की इच्छा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। विद्यार्थियों ने अपनी ध्यान केंद्रित रखने की क्षमता को खो दिया है।

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ने किया बंटाधार
विद्यालयों के स्टाफ द्वारा ऑनलाइन पढ़ाए जाने पर डिजिटल विकृति, अनैतिकता, ऑनलाइन नाममात्र उपस्थिति दर्ज कराने जैसी त्रुटियां सामने आई है। ज्यादातर विद्यार्थियों में सीखने की प्रवृति निम्न स्तर की रही।

ऑनलाइन पाठ्यक्रम
कोविड़-19 के दौरान स्कूलों के सामने मुख्य चुनौती ऑनलाइन पाठ्यक्रम पूरा करवाना रही। स्कूलों का पाठ्यक्रम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है।अनिवार्य विषयों में शिक्षकों की कमी देखी जा रही है।जिससे अध्यापक स्टॉप पर अतिरिक्त अध्यापन का भार बढ़ रहा है। 70 प्रतिशत विधार्थी लंबे गैप के कारण सीखना नहीं चाहते। 30 प्रतिशत बच्चे लाभान्वित हुए हैं।

पढ़ाई का अतिरिक्त भार
विद्यालयों में लर्निंग गैप के चलते विद्यार्थियों को 2 घंटे तक पढ़ाया जा रहा है। विद्यार्थियों से प्रश्न से पूछे जा रहे हैं। प्रश्नों के आधार पर विद्यार्थियों का आंकलन किया जा रहा है। अपनी कक्षा के साथ लर्निंग गैप को पूरा करने में विद्यार्थियों पर अतिरिक्त भार आ गया है।

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