बंदरों का आतंक! जिम्मेदारों के तर्क में ग्रामीणों का जीना मुश्किल, दो माह में 20 मोरों की मौत, 16 ग्रामीणों को किया घायल

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प्रशासन हमारी मांग सुनो, बंदरों के आतंक से दिलाएं छुटकारा

नीमकाथाना: निकटवर्ती ग्राम गांवड़ी से एक अजीबो-गरीब खबर सामने आई है। गांव में बड़ी संख्या में मौजूद बंदरों के समूह ने करीब 20 मोरों को मार डाला। ग्राम गावड़ी के लोगों का कहना है कि बंदरों द्वारा मोरों को मारने का सिलसिला विगत दो माह से जारी है। जब  नीमकाथाना न्यूज़ की टीम ग्रामीणों के बीच पहुंची तो घायल महिलाओं ने हाथ जोड़कर प्रशासन से बंदरों के आतंक से छुटकारा दिलाने की मांग की।

मोरों की मौत का कारण, बंदरों की बढ़ती भूख
स्थानीय लोगों ने बताया कि वन क्षेत्र में बढ़ती मानवीय दखल-अंदाजी के कारण बंदर वन सीमा से सटे आबादी क्षेत्र गांवड़ी की ओर बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में बंदर भूख मिटाने को लेकर संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। भूख मिटाने के लिए बंदर लगातार राष्ट्रीय पक्षियों पर हमला कर रहे हैं।
ग्रामीणों की बंदरों को पकड़वाने की मांग
ग्रामवासी मोहित शर्मा ने बताया कि विगत 6 माह से ग्रामीण बंदरों के आतंक से परेशान है। वन में भटक कर बड़ी संख्या में आए बंदरों के झुंड घरों में घुसकर खाने व रोजमर्रा जीवन में काम आने वाली वस्तुओं का नुकसान करते हैं। उन्होंने बताया कि बंदर छत पर रखी पानी की टंकियों से जुड़े पाइप को क्षतिग्रस्त कर देते हैं।

बंदरों के आतंक से ग्रामीण परेशान
घायल महिला ने बताया कि बड़ी संख्या में बंदर खाने की तलाश में एक घर से दूसरे घर में छलांग लगाकर पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि बंदर रसोई घर तक पहुंच कर नुकसान कर रहे हैं। 
बंदर छत पर सुख रहे कपड़ों को फाड़ देते हैं। ग्रामीण बंदरों के आतंक से परेशान हैं। वहीं ग्रामीणों ने सरपंच पर आरोप लगाया कि बंदरों के आतंक से बचाने को लेकर सरपंच ने बालाजी की सवामणी करने का हवाला दिया।

बंदरों ने 16 से अधिक लोगों को जख्मी किया
गांव गावड़ी में बंदरों ने बीते महीने ही 16 से अधिक लोगों को हमला कर जख्मी कर दिया। ताजा मामले में बंदर ने एक 6 वर्षीय बालिका को काट कर जख्मी कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि बंदरों के आतंक के कारण वे अपने बच्चों को अकेला नहीं छोड़ पा रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बंदरों को पकड़ने की मांग की है।

क्षेत्र में बंदर व मोरों की स्थिति
वन्य जीव संख्या आकलन कर वर्ष 2022 के अनुसार नीमकाथाना वन क्षेत्र में लंगूरों की संख्या 1146 है। वही बंदरो(लाल मुंह) की संख्या 1988 है। वन क्षेत्र में मोरों की संख्या 1088 से ऊपर है। गांवड़ी क्षेत्र में मोरों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। धार्मिक आस्था व पर्यावरण की दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखने वाले गांव गावड़ी में दोनों ही प्रकार के बंदरों की जाति बड़ी संख्या में पाई जाती है।

जिम्मेदारों का तर्क

1.स्थानीय निकाय संबंधित ग्राम पंचायत अपने स्तर पर उत्पाती बंदरों को पकड़वा कर अन्यत्र जगह छोड़ सकती है। विभाग इसके लिए वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के अनुसार अनुमति देता है। विभाग द्वारा इस समस्या का समाधान बजट, स्टाफ एवं अन्य संसाधन से संभव नहीं है।

श्रवण बाजिया
वन क्षेत्रीय अधिकारी, नीमकाथाना।

2.ग्राम गावड़ी में दिनोंदिन उत्पाती बंदरों का आतंक बढ़ रहा है। प्रशासन को बार बार अवगत करवाया गया। लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा बंदरों को पकड़ने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

शेरसिंह
सरपंच, ग्राम पंचायत गांवडी।

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