नीमकाथाना। पुलिस विभाग द्वारा आमजन में विश्वास, अपराधियों में डर महज एक स्लोगन बनकर रह गया। मामला पाटन थाने का है जहां परिवादी मामले में कार्यवाही के लिए जाते है तो वहां पर परिवादियों से ही अपराधियों जैसा बरताव किया जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। परिवादी के साथ पत्रकार दीपक शर्मा द्वारा मामले में न्याय की मांग करने थाने पहुंचे थे। लेकिन वहां न्याय तो दूर की बात वहां पाटन थाने के हैड कांस्टेबल जगरूपसिंह, थानाधिकारी बृजेश तंवर, उप पुलिस अधीक्षक गिरधारीलाल शर्मा एवं दो पुलिस कास्टेबलों के द्वारा अपने पद का दुरूपयोग कर परिवादियों के सामने पत्रकार के साथ बर्बरतापूर्वक गम्भीर मारपीट करने, गन्दी गन्दी गाली गलौच करने, कुछ खाली कागजों पर एवं कुछ कागजों पर अपनी मनमर्जी से लिखवा कर जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाने पीड़ित की चोटी उपाड़ने एवं धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने व रिश्तेदार द्वारा छुड़ाने की कोशिश करने पर धमका कर धक्का देकर भगाने एवं फर्जी व अशुद्ध दस्तावेज तैयार किए गए। मामले को लेकर परिवाद पुलिस अधीक्षक सीकर को प्रेषित किया गया है। इस पर भी पुलिस अधीक्षक सीकर के द्वारा समुचित कार्यवाही नहीं होने पर न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद प्रस्तुत हुआ है। संयोग से न्यायालय में थानाधिकारी बृजेश तंवर भी आया हुआ था। न्यायालय ने उक्त अभियुक्त को लताड पिलाते हुए परिवादी के द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर अब तक की गयी कार्यवाही बाबत तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की गयी है। 
परिवादी के द्वारा पुलिस उच्चाधिकारियों को भी रिपोर्ट भेजकर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध समुचित कानूनी कार्यवाही करने की मांग की गयी है। परिवादी दीपक शर्मा एवं उनका परिवार इस घटना से उबर नहीं पाया है। ये सभी अभी तक आहत व भयभीत हैं। इसलिये जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग करते हैं।

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