नीमकाथाना का का हेल्थ सिस्टम राम भरोसे है, राम भरोसे का मतलब आप जिसके भरोसे है, उसकी आपके लिए कोई अनिवार्य जवाबदेही की गारंटी का न होना ! यह हमारा नहीं बल्कि जाने माने अंग्रेजी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार दीप मुखर्जी का कहना है।

गत 15 मई 2021 को प्रसिद्ध अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार Miss Rebecca Conway एवं द इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार Deep Mukherjee नीमकाथाना हेल्थ सिस्टम को कवर करने के लिए पहुंचे। उसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने बधाईयों का तांता लगा दिया। ये बधाई आम व्यक्ति ही नहीं यहां का स्थानीय प्रशासन के मुखिया सहित कार्मिकों ने भी व्हाट्सएप ग्रुपों में दोनों पत्रकारों से बातचीत करने पर संतोष जाहिर करने का संदेश भेजते रहे है। 

लेकिन दीप मुखर्जी ने नीमकाथाना के हेल्थ सिस्टम की पोल खोल देने वाली कवर स्टोरी प्रकाशित करके सच्चाई का आईना दिखाया है।  नीमकाथाना हॉस्पिटल पर की गई रिपोर्टिंग की यह कवर स्टोरी भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में न्यूज़ हेड लाइन बनी।

फोटो- नीमकाथाना कपिल अस्पताल में Miss Rebecca Conway

The Indian Express:
News Report By  Deep Mukherjee- 

क तकिए के सहारे अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए 79 वर्षीय जगदीश प्रसाद मित्तल, अपने बेटे मनोज की तरफ देख रहे हैं, जो कि लोगो से यह पूछते फिर रहे हैं  कि क्या नीम का थाना से 120 किलोमीटर की दूरी पर किसी भी अस्पताल में आईसीयू बेड उपलब्ध है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नीम का थाना के कोविड वार्ड में उनके सामने, एक और सेप्टुजेनेरियन (69 और 79 साल के बीच की उम्र) मरियम बानो सांस लेने के लिए हांफ रही थी, फिर उनका शरीर अचानक ऐंठ जाता है। बानो का पोता सैयद यूनुस वार्ड में डॉक्टर के लिए चिल्लाता है, डॉक्टर अपने नर्सिंग स्टाफ के साथ उसकी जांच करने के लिए आते है। लेकिन कुछ देर बाद बानो के बिस्तर के चारों ओर एक पर्दा डाल कर उसे मृत घोषित कर जाता है।

- दीप मुखर्जी आगे लिखते है, द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा गांवों में यात्रा करते हुए देख रहे हैं कि जयपुर ग्रामीण और सीकर जिले के आस-पास के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली कई समस्याओं ऑक्सीजन की कमी, बंद पड़े वेंटिलेटर, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के साथ कर्मचारियों की कमी के बावजूद काम करने के लिए संघर्ष कर कर रही है। 

नीम का थाना के सीएचसी के रूप में कार्य करते हुए लगभग 180 राजस्व गांवों और 59 ग्राम पंचायतों को कवर करता है। प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ जीएस तंवर कहते हैं कि एक हफ्ते पहले 8 मई को, 30-ऑक्सीजन-बेड से कोविड देखभाल सुविधा शुरू की थी। “हमें अधिक रोगियों के लिए इस क्षमता को 40 ऑक्सीजन बेड तक बढ़ाना पड़ा। हॉस्पिटल के पास एक प्लांट है जो 16 पॉइंट तक ऑक्सीजन देता है।"

मरीजों से की गई बातचीत  के दौरान मिले उनके अनुभव- 


1) व्यवसायी, मनोज मित्तल दीप मुखर्जी से कहते हैं कि यह पहली बार है जब वह अपने पिता को सरकारी अस्पताल में लाए है। क्योंकि निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी और भी बदतर थी। “मेरे पिता को आईसीयू बेड की जरूरत है। मैं सुबह से कोशिश कर रहा हूं, लेकिन हर जगह बेड भरे हुए हैं। कल मेरे पिता का ऑक्सीजन लेवल घटकर 80 हो गई थी बाद में स्थानीय विधायक के कहने पर सीएचसी में बिस्तर की व्यवस्था की गई।

2) वहीँ बानो के पोते सैयद यूनुस ने अपनी कमीज से अपने आंसुओं को रोकने की बहुत कोशिश की। कहा “हम यहां लगभग 20 दिन पहले आए थे। मेरी दादी का कोविड टेस्ट नेगेटिव आया लेकिन उनकी सांस फूल रही थी। उनका ऑक्सीजन लेवल लगभग 69 था, लेकिन उसे वेंटिलेटर पर नहीं रखा गया था। वह जीवित रहती अगर उसे लगातार ऑक्सीजन मिलती और उसे वेंटिलेटर पर रखा जाता।

- दीप मुखर्जी आगे लिखते हैं कि वार्ड के ठीक बगल में सीएचसी की गहन चिकित्सा इकाई है जिसमें आठ वेंटिलेटर बेड रखे गए हैं। लेकिन कमरे में कोई मरीज नहीं था, शनिवार को भी मशीन चालू नहीं थी। वेंटिलेटर को बंद क्यों रखा गया है यह पूछे जाने पर नीम का थाना के उपखण्ड अधिकारी बृजेश कुमार ने कहा, “हमारे ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता 150 लीटर प्रति मिनट है। वेंटिलेटर पर प्रत्येक रोगी लगभग 50 लीटर प्रति मिनट की जरुरत होगी। हमारे पास ऐसे 16 बेड हैं जिन्हें इस लाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। हमें या तो इन मरीजों को हटाना होगा या उनके लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करनी होगी। 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने माना कि मामलों में लगातार वृद्धि के साथ, ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो रही है। मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि “हमारे जिले में ऑक्सीजन सिलेंडर की कुल आवश्यकता एक दिन में लगभग 1,500 सिलेंडर है। अभी हमें 750-800 सिलेंडर ही मिलते हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर की बात करें तो प्रति मरीज इसकी खपत लगभग 1.7 सिलेंडर प्रतिदिन हो गई है अस्पताल कोविड मरीजों से भरे पड़े हैं। डॉक्टरों को सभी को व्यवस्थित करने के लिए प्रति मरीज ऑक्सीजन की खपत के प्रवाह को समायोजित करना होगा। 

विदेशी अखबारों में बनी हेडलाइन

1) THE EPOCH TIMES

2) THE NATIONAL NEWS



3) THE NEWYORK POST



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