नीमकाथाना। जब मन में कुछ करने की लगन हो और इरादे बुलंद हो तो कामयाबी जरूर मिलती है। उपखंड के ग्राम गुहाला के रहने वाले कैलाश चंद सामोता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। भारतीय सेना में सिपाही से भर्ती होकर अपनी लगन और मेहनत से भारतीय थल सेना में कर्नल पद पर पदोन्नति पाईं। 


कर्नल कैलाश का जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा वर्ष 1997 में उनके पिता रामदेव ठेकेदार का देहांत हो गया था तब कैलाश 14 वर्ष के थे उनके पिता बीज विकास मंडी हिसार में ठेकेदारी का कार्य करते थे। कर्नल कैलाश की प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल गुहाला में हुई, स्नातक राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से किया। 

वर्ष 2000 में सामोता सेना में नर्सिंग सहायक पद पर भर्ती हुए और 2005 में विशेष चिकित्सा सहायक पद पर पदोन्नत हुए। वर्ष 2007 में सेना के अधिकारी पद की परीक्षा देकर 2008 में लेफ्टिनेंट पद ग्रहण किया। वर्ष 2015 व 2020 में कर्नल सामोता को सेना के मध्य कमान वह प्रशिक्षण कमान द्वारा कर्तव्यनिष्ठा के कार्य दक्षता के प्रशंसा पत्र से नवाजा गया। सामोता के कर्नल पद पर पदोन्नत होने पर ग्रामवासी ने कहा कि युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गए।

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