हरिकिशन राव की स्पेशल रिपोर्ट.....✍️
नीमकाथाना/पाटन@ सीकर जिले का सबसे बड़ा रायपुर बांध बारिश के अभाव में खाली पड़ा हुआ है जिस कारण आने वाले समय में किसानों को पेयजल संकट का भारी सामना करना पड़ेगा। रायपुर बांध के भरने से इसका फायदा खारिया काचरेडा, सांपाला, भांडाला, छाजा की नांगल, धांधेला, बेंवा, खिंवाला, हसामपुर, ब्राह्मणों की ढाणी, व रामपुरा तथा दलपतपुरा सहित दर्जनों  गांवों के किसानों को मिलता है। बांध की भराव क्षमता 17 फुट है तथा इसकी लंबाई लगभग 3 किलोमीटर है।
कम बारिश के कारण जिले का सबसे बड़ा बांध आज अपने आप में दम तोड़ता दिखाई दे रहा है। बारिश से पहले सिंचाई विभाग ने बांध की खुदाई भी करवाई थी तथा इसकी दीवारों का काम भी करवाया था परंतु बांध में पानी नहीं आने से बांध के नजदीक लगने वाले गांवों के किसानों के चेहरों पर मायूसी देखने को मिल रही है। इन दिनों मानसून भी बहुत कमजोर पड़ गया है ऐसे में अनुमान लगाना भी गलत है कि बांध में पानी आएगा। हर वर्ष से औसतन कम बारिश होने के कारण ही रायपुर बांध खाली रह गया हालांकि क्षेत्र में बनाए गए एनीकटो में तो पानी आया है परंतु बांध अभी भी  खाली पड़ा हुआ है। पुर्व में रायपुर बांध को भरने के लिए कुंभाराम लिफ्ट परियोजना का पानी लाने की चर्चाएं जोरों पर रही थी परंतु वह योजना भी अभी दम तोड़ती हुई दिखाई दे रही है। अगर इस बांध में यमुना का पानी नहीं आया तो यहां के किसानों का हाल बेहाल हो जाएगा। पुर्व में नीमकाथाना के तत्कालीन विधायक रमेश खंडेलवाल ने रायपुर बांध में कुंभाराम लिफ्ट परियोजना का पानी के लिए नीमकाथाना से जयपुर पैदल यात्रा करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को ज्ञापन देकर कुंभाराम लिफ्ट परियोजना की मांग की थी। परंतु वह मांग भी कागजों में सिमट कर रह गई है।

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