शहर में फिल्टर प्लांट की नहीं हो रही जांच, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
नीमकाथाना-शहर में आरओ वाटर के नाम पर पैसे कमाने का खेल जोर-शोर से चल रहा है। शहर में पानी की उपभोक्ता मांग बढ़कर करीब बीस हजार लीटर से ज्यादा हो गई है। लेकिन आरओ वाटर के नाम पर बिक रहा पानी शुद्धता के मानदंडों पर कितना खरा है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। क्योंकि स्थानीय प्रशासन की ओर से पानी के नमूनों की जांच नहीं कराई गई है।
ऐसे में मंगलवार को शाहपुरा रोड़ स्थित बिट्टू मार्बल की दुकान में पानी की केन में जिंदा सांप का बच्चा तैरता हुआ मिला। दुकान मालिक दिनेश अग्रवाल ने बताया कि वह रोज पिंटू वाटर सप्लाई से पानी की केन मंगवाता है। रोज की तरह आज भी पानी की केन देकर गया। दुकान पर ग्राहक आया और केन से पीने के लिए ढक्कन खोल लो देखा केन में सांप का जिंदा बच्चा तैर रहा था। ये तो गनीमत रहा कि युवक ने सर्प को देख लिया अगर पानी पी लेता तो जनहानि हो सकती थी।
नीमकाथाना में इन दिनों वाटर सप्लाई का खेल धड्ड़ले से चल रहा है शहर में बिना जांच किए हुए पानी सप्लाई कर रहे है जिससे लोगो के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उल्लेखनीय हैं कि हर महीने 600 से 1200 रुपए खर्च करके लोग जिस पानी को शुद्ध मानकर पी रहे है उसमें कितनी मात्रा में मिनरल्स है और लोगों की सेहत के लिए कितना मुफीद है, इस बारे में कोई नहीं जानता है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा वाटर फिल्टर प्लांटों के दस्तावेज एवं पानी की गुणवत्ता की जांच नहीं की जाती हैं। जिससे वाटर प्लाॅट मालिकों के हौंसले बुलंद हो रहे हैं। 
यह सप्लायर फैक्ट्री लाइसेंस की जगह फूड सेफ्टी विभाग से लाइसेंस लेकर पानी बेचने का धंधा कर रहे हैं। फिल्टर प्लांट से ट्यूबवेल का पानी जार में भरकर सप्लाई किया जाता है। 10 लीटर की केन के साथ बड़ी टंकी में पानी भरकर वाहन से घर, दुकान व आफिस में सप्लाई होता है। पानी स्टोरेज व भरने के स्थान पर गंदगी फैली रहती है। लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है। इन प्लांटों में पानी का टीडीएस नापने के लिए भी किसी जिम्मेदार ने जरूरत नहीं समझी है। 


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