जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग व विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने मैरिज हॉल को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने बायलॉज की शर्तों के अनुरूप संचालित नहीं होने वाले या बगैर लाइसेंस के चलने वाले मैरिज हॉल को सीज करने के निर्देश दिए हैं।


खंडपीठ ने यह निर्देश याचिकाकर्ता अरुण कुमार मोहता की ओर से माहेश्वरी जन उपयोगी भवन को लेकर दायर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए दिए। याचिका में बताया गया, कि नगरपालिका अधिनियम 2009 के तहत मैरिज हॉल के लिए बायलॉज बने हुए हैं। बायलॉज के अनुसार मैरिज हॉल संचालित करने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। बिना लाइसेंस मैरिज हॉल संचालित करने पर उसे सीज करने का प्रावधान है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता एनआर चौधरी ने तर्क दिया कि बिल्डिंग में आगजनी की घटना पर नियंत्रण करने के इंतजामों का भी अभाव है। सेटबैक कवर करके बिल्डिंग का निर्माण कर दिया गया। बायलॉज के अनुसार लाइसेंस भी नहीं लिया गया और शादी-ब्याह के आयोजन किए जा रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने निगम से जवाब तलब किया था।

एएजी राजेश पंवार व अधिवक्ता श्याम पालीवाल ने जवाब में कोर्ट को जानकारी दी, कि भवन में शादी- ब्याह के आयोजन की अनुमति नहीं दी गई। बिना लाइसेंस के शादी-ब्याह के आयोजन नहीं करने के लिए नोटिस भी दिया गया है।

दोनों पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने निर्देश दिए, कि शहर के ऐसे सभी मैरिज हॉल जो बायलॉज के अनुसार रजिस्टर्ड नहीं हैं या संचालित नहीं किए जा रहे हैं, उनके खिलाफ नगर निगम कार्रवाई कर उन्हें सीज करे। कोर्ट ने माहेश्वरी जन उपयोगी भवन में भी बायलॉज की शर्तें पूरी करने और बायलॉज के तहत लाइसेंस लेने पर ही समारोह के आयोजन को कहा।

बिना लाइसेंस शादी-ब्याह के आयोजन करवाए जाते हैं तो इसे भी सीज किया जाए। 28 अप्रैल 2017 को कोलकाता में व्यवसाय करने वाले उत्तम कुमार मोहता की बेटी की शादी के आयोजन में उसके भाई के बच्चे की भवन के दूसरी मंजिल की खिड़की से गिरने से मौत हो गई थी।

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