झुंझुनूं- विशिष्ट न्यायाधीश यौन हिंसा से बालकों का संरक्षण अधिनियम प्रकरण (विशिष्ट न्यायाधीश, अनु.जाति, जनजाति अत्याचार निवारण प्रकरण) झुंझुनूं नीरजा दाधिच द्वारा दिए गए एक निर्णय में एक नाबालिग से दुष्कर्म करने के आरोपी सुनील कुमार पुत्र बालूराम बिजोलिया निवासी किरोड़ी को 10 वर्ष के कठोर कारावास व 10 हजार रुपए अर्थदण्ड से दण्डित करते हुए यह भी आदेश दिया है कि अर्थदण्ड अदा नहीं करने पर उसे 6 माह का कठोर कारावास और भुगतना होगा।

मामले के अनुसार, 28 अप्रैल, 2015 को पीड़िता के माता-पिता ने एक लिखित रिपोर्ट कोतवाली झुंझुनूं पर दी कि उसकी 16 वर्षिय पुत्री जो कक्षा दस में एक निजी विद्यालय झुंझुनूं में पढ़ती है तथा 27 मार्च, 2015 को प्रात: घर से 10वीं की परीक्षा देने झुंझुनूं स्थित एक परीक्षा केन्द्र पर गई थी, जो परीक्षा समाप्ती के बाद भी घर नहीं पहुंची तो उन्होंने अपनी लड़की को इधर-उधर तलाश किया तथा परीक्षा केन्द्र पर पता लगाने पर उसके द्वारा परीक्षा नहीं देना बताया गया।

रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी पुत्री को सुनील कुमार निवासी किरोड़ी रोड़, धोबीघाट उदयपुरवाटी शादी की नियत से बहला-फुसलाकर भगाकर ले गया आदि। पुलिस ने इस रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर बाद जांच सुनील कुमार के विरूद्ध बलात्कार व लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम आदि में सम्बन्धित न्यायालय ने चालान पेश कर दिया।

विशेष लोक अभियोजक नंद किशोर शर्मा ने बताया कि इस मामले में इस्तगासा पक्ष द्वारा कुल 14 गवाहों के बयान करवाए गए तथा करीब 25 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए। न्यायाधीश ने पत्रावली पर आई साक्ष्य का बारिकी से विश्लेषण करते हुए सुनील कुमार को उक्त अनुसार सजा देने के साथ-साथ अन्य विभिन्न धाराओं में भी और सजा देते हुए सभी मूल सजाएं साथ-साथ भुगतने का आदेश दिया तथा न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि इस अपराध के परिणामस्वरूप पीड़िता को जो शारीरिक व मानसिक क्षति हुई है उसके पुनर्वास के लिए राजस्थान पीड़ित प्रतिकर स्कीम के नियमों के तहत पीड़िता को उचित मुआवजा भी दिए जाने का आदेश दिया है। 

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