फिल्म पद्मावती: फिल्म पद्मावती के विवाद में कूद पड़े हैं। गत दिनों वे एक सेशन में पहुंचे थे, जहां उन्होंने कहा..., ‘पद्मावती की कहानी उतनी ही नकली है जितनी कि सलीम आैर अनारकली की। इसका इतिहास में कहीं भी जिक्र नहीं है। अगर लोगोों की वाकई इतिहास में रुचि है तो उन्हें फिल्मों की बजाय किताबों से समझना चाहिए।
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जावेद अख्तर ने कुछ समय पहले कहा था कि, रानी ‘पद्मावती’ मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा अकबर के युग में लिखा गया पहला हिंदी नॉवल था। यह इतिहास नहीं, बल्कि सलीम और अनारकली की तरह पूरी तरह एक काल्पनिक कथा है।' उनके इस बयान के बाद खूब शोर मचा था, कुछ लोगों ने जावेद अख्तर को खूब खरी-खोटी सुनाईं। जावेद अख्तर ने एक बार फिर यही बात दोहराई है।

उन्होंने फिल्म पद्मावती पर चुटकी लेते हुए कहा मैं इतिहासकार नहीं हूं। मैं तो इतिहासकारों को पढ़कर ये बात आपको बता सकता हूं। एक दिन मैं टीवी पर इतिहास के एक प्रोफेसर को सुन रहा था।

उन्होंने बताया, ‘पद्मावत' की रचना और अलाउद्दीन खिलजी के समय में लंबा गैप था। जायसी ने जिस वक्त इसे लिखा, उसमें और खिलजी के शासनकाल में करीब 200 से 250 साल का गैप था। अलाउद्दीन खिलजी के दौर में भी काफी इतिहास लिखा गया, लेकिन तब के इतिहास में पद्मावती का नाम कहीं पर भी नहीं है।

जोधाबाई भी अकबर की पत्नी नहीं थीं... जावेद आगे बोले..., ‘जोधा-अकबर को ही ले लीजिए। उन पर फिल्म बनाई गई। ‘मुगल-ए-आजम' में भी जोधाबाई थीं लेकिन हकीकत में जोधाबाई अकबर की पत्नी थी ही नहीं। बस फिल्म से किस्सा मशहूर हो गया, आैर लोग मानने भी लगे। कहानियां बन जाती हैं उसमें क्या हैं?

जावेद अख्तर ने अंत में कहा..., ‘फिल्मों को इतिहास मत समझिए और इतिहास को भी फिल्म के नजरिए से मत देखिए। आप गौर से फिल्में देखिए और एंजॉय कीजिए। अगर इतिहास में बहुत रुचि है तो गंभीरता से इतिहास पढ़िए। बहुत सारे इतिहासकार हैं जिन्हें आप पढ़ सकते हैं।

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