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कपिल अस्पताल नीमकाथाना डॉक्टर्स हड़ताल पर विशेष रिपोर्ट...

मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पताल भेज रहे हैं डॉक्टरों ने लिखी बाहरी दवा, लोगों ने जताया विरोध

कपिल अस्पताल नीमकाथाना: डॉक्टर्स की हड़ताल का असर अब जिले के दूसरे बड़े कपिल अस्पताल पर नजर आने लगा है। हड़ताल के छठे दिन कपिल अस्पताल खाली था। शनिवार को 400 मरीज इलाज के लिए आए। पहले 1500 मरीजाें की ओपीडी थी। यहां वार्डों के ताले लटके हैं। पंजीकरण कक्ष भी सूना रहा।
इधर, गिरफ्तारी के डर से इलाके के सभी डॉक्टर भूमिगत हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक कई डॉक्टर मेडिकल से जुड़े लोगो के संपर्क में हैं। वे गाइड भी कर रहे हैं। गंभीर बीमारी के मरीजों के लिए फोन पर दवा लिखवा रहे हैं।

नीमकाथाना के कपिल अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल का असर, सभी वार्ड हुए खाली, पर्ची काउंटर सूने

कपिल अस्पताल के कार्यवाहक पीएमओ धर्मेंद्र यादव के मुताबिक डाक्टर्स की हड़ताल का असर दिखने लगा है। यहां के गंभीर बीमारी के मरीजों को खेतड़ी रोड स्थित शर्मा अस्पताल भेज रहे हैं। दूरी अधिक होने से मरीजों के लिए दो एंबुलेंस लगाई गई हैं जो मरीजों को निजी अस्पताल लेकर जाती हैं।

कपिल अस्पताल में हरियाणा व झुंझुनूं तक के मरीज आते हैं। पाटन, सिरोही, टोडा, गुहाला, गणेश्वर, भूदोली के सीएचसी व पीएचसी केंद्रों पर भी ओपीडी कम रही। यहां इक्के-दुक्के मरीज ही इलाज के लिए आए। जीलो में पहले प्रतिदिन 70 मरीजों की ओपीडी थी। वहीं डाबला में 50 मरीज आते थे, लेकिन हड़ताल के बाद 4-5 मरीज ही आ रहे हैं।

सोनाग्राफी मशीन पर ताला, 50 रोगियों की जांच अटकी

हड़ताल के चलते अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन को ताला लटका है। यहां करीब 50 मरीजों की सोनोग्राफी जांच होती थी। लेबोरेट्री में भी करीब 150 मरीजों की जांच होती थी जो घटकर 25-30 रह गई है। एक्सरे भी कम हुए।

गायनिक के 25 बैड हैं जो खाली हैं। यहां से प्रसूताओं को निजी अस्पताल भेज रहे हैं। इमरजैंसी में भी मरीज नहीं आ रहे हैं। मरीजों की तादाद कम होने से शनिवार को अस्पताल के कार्मिक इधर उधर टहलते रहे।

कपिल अस्पताल में हड़ताल से वार्ड खाली। शनिवार को कार्मिकों ने वार्डों में पंखों की सफाई की।
निशुल्क दवा नहीं लिखने पर मरीज हुए गुस्सा :

कपिल अस्पताल के मरीजों काे इलाज के लिए खेतड़ी रोड स्थित निजी अस्पताल भेज रहे हैं। अारोप है कि चिकित्सक सरकारी पर्ची पर दवा नहीं लिख रहे। इससे मरीजों को निशुल्क दवा नहीं मिल रही।

मामले में करीब आधा दर्जन लोगों ने कार्यवाहक पीएमओ धर्मेंद्र यादव को शिकायत दी है। इधर, मामले में मरीजों के परिजन निजी अस्पताल के डॉक्टरों पर गुस्सा हो गए। वे उनसे उलझ भी गए।

60 वर्षीय गिरधारी गुर्जर ने बताया कि हाथ-पैरों में सूनापन होने पर कपिल अस्पताल आया था। जहां से निजी अस्पताल भेजा गया। वहां डॉक्टरों ने खुद की पर्ची पर बाहरी दवा लिखी। उनका बेटा बाबूलाल कपिल अस्पताल के दवा केंद्र पर आया तो डीडीसी कार्मिकों ने दवा नहीं दी। ऐसे में रुपए देकर दवा खरीदी गई।

पुलिस ने मारे छापे, नहीं मिले डॉक्टर

हड़ताल पर चल रहे डॉक्टर्स को गिरफ्तार करने के लिए शनिवार को पुलिस ने अस्पताल में क्वाटर्सव निजी मकानों पर छापे मारे। नीमकाथाना इलाके में पुलिस को एक भी डॉक्टर नहीं मिला। सरकार की सख्ती के बाद डॉक्टर्स मोबाइल बंद कर अंडरग्राउंड हो गए।

डॉक्टर्स की तलाश में छापामार कार्रवाई करती पुलिस, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
हालांकि रेस्मा लागू होने के बाद से ही डॉक्टर्सगिरफ्तारी के डर से सतर्क थे। कपिल अस्पताल कैंपस में बने सभी सरकारी क्वाटर्स पर ताले लटके हुए हैं। पुलिस को किसी भी डॉक्टर के बारे में जानकारी नहीं मिली। एसडीएम जेपी गौड़ ने भी अस्पताल पहुंचकर मरीजों को उपचार दिलाने के लिए नर्सिंग स्टाफ को निर्देश दिए। निजी अस्पताल के डॉक्टर्स से भी सहयोग मांगा गया है।

फिलहाल कपिल अस्पताल में आयूष डॉक्टर्स को लगाया गया है। हालांकि अधिकांश मरीज इलाज के लिए निजी अस्पताल पहुंच रहे हैं। कोतवाली इंचार्ज मनोहर चनेजा ने बताया कि डॉक्टर्स की तलाश कर रहे हैं। सभी डॉक्टर्स मोबाइल बंद कर भूमिगत हो गए हैं। क्वाटर्सव निजी मकानों पर भी कोई नहीं है।

पांच दिनों तक अस्पताल के क्वाटर में रहे डॉ. जाखड़, आज मोबाइल बंद कर भूमिगत हुए

हड़ताल में शामिल कपिल अस्पताल के सर्जन डॉ. आरएस जाखड पांच दिनों तक कपिल अस्पताल के ऊपर बने क्वाटर में रहे। इस दौरान वे अपनी गाड़ी से बाहर घूमने भी निकले। अस्पताल के पोर्च में उनकी गाड़ी पार्क रही।

रेस्मा के दौरान भी डॉ. जाखड़ अस्पताल के क्वाटर में रहे। शनिवार सुबह 10 बजे बाद वो अपनी गाड़ी लेकर भूमिगत हो गए। उन्होंने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया। पांच दिनाें में डॉ. जाखड़ कई निजी कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। डॉ. जाखड़ से मामले में बातचीत नहीं हो पाई।

Source- Neemkathana Bhaskar

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