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News Update

नीमकाथाना में सरपंच पति की हत्या के नौ दोषियों को 10 साल की जेल

कानून के हाथ बहुत लम्बे होते है। ये बात तो आपने सुनी ही होगी। यह बात आज ठीक बैठती हुई लगती है जब अपरजिला एवं सेशन न्यायाधीश भारत भूषण गुप्ता ने बुधवार को छह साल पुराने सरपंच पति की हत्या वाले केस की सभी गुथियों को सुलझा कर नौ दोषियों को 10 साल जेल की सजा सुनाई। मामले का फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने नौ लोगों को 10 साल की जेल के साथ साथ 20-20 हजार रुपए भी लगा दिया। इसी मामले में 10 मार्च 2015 को एडीजे कोर्ट ने आरोपी मदन उर्फ मनोज को धारा 304 भाग प्रथम एवं 447 में दोषी मानते हुए सात साल की जेल जुर्माने की सजा सुनाई थी।

नीमकाथाना की खबर
                                                   source- google images

यह घटना नौ जून 2011 की थी जिसमें पुलिस ने 22 मई 2015 को नौ आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी। हाईकोर्ट ने परिवादी की अपील पर मामले में शीघ्र सुनवाई कर चार माह में निर्णय के आदेश दिए। इसे फिर दो माह और बढ़ाया गया। प्रकरण में 23 गवाह पेश हुए। लगातार सुनवाई के बाद बुधवार को कोर्ट का फैसला आया। राजनीतिक परिवारिक रंजिश के कारण उक्त इलाके में खासा चर्चित रहा है। घटना के वक्त मृतक भगवानाराम की पत्नी फूलीदेवी डोकन ग्राम पंचायत की सरपंच थी।


एडीपी मातादीन मीणा एडवोकेट सत्यनारायण सैनी ने बताया कि नौ जून 2011 को डोकन के नारदा गांव में दोपहर 12 बजे अपने खेत में पेड़ के नीचे सो रहे भगवानाराम गुर्जर की राजनीतिक रंजिश के चलते लाठियों से पीटकर हत्या कर दी थी। मामले में महेश पुत्र रामस्वरूप गुर्जर ने पाटन पुलिस में मदन, लक्ष्मीनारायण, संतराम,  बिड़दीचंद, राजेश, राकेश, गोपीचंद, विक्रम ज्ञानचंद और रमेश के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद मदन उर्फ मनोज के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। शेष आरोपियों के खिलाफ धारा 173(8) में अनुसंधान लंबित रखा। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने मामले में हाईकोर्ट में अपील कर दी।

सजा सुनते ही कोर्ट रूम में ही रोने लगे आरोपी 

एडीजेकोर्ट में हत्या के मामले में फैसला सुनने के बाद सभी आरोपी रोने लगे। हत्या के मामले में चालानी गार्ड आरोपियों को कोर्ट रूम लेकर आए थे। मामले में संतराम, रमेशचंद्र, ज्ञानचंद, विक्रमसिंह, , राजेश उर्फ झब्बू, बिड़दीचंद  लक्ष्मीनारायण, गोपीराम, राकेश को धारा 304 भाग प्रथम सपठित धारा 149 में दोषी करार देते हुए 10 वर्ष की जेल एवं 20-20 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह माह कठोर कारावास की सजा अतिरिक्त भुगतनी होगी। धारा 148 में तीन वर्ष कठोर कारावास एवं दो हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 447 में तीन माह कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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