गालव गंगा तीर्थस्थल पर शिव गंगा प्राचीन मंदिर का जीर्णोधार व प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न, मंदिर हमारी अनमोल धरोहर डॉ.तंवर

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नीमकाथाना/गणेश्वर: गालव गंगा तीर्थस्थल पर शिव गंगा प्राचीन मंदिर का जीर्णोधार व प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम आज संपन्न हुआ। इस अवसर पर नीमकाथाना के भामाशाह व समाजसेवी डॉ.जी.एस. तंवर ने इस सेवा कार्य के लिए शिक्षक सुभाष शर्मा के परिवारजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मंदिर हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर है। यह हमारे श्रद्धा एवं विश्वास के पवित्र केंद्र हैं। इनका संरक्षण करना हम सभी का परम कर्तव्य है।
डॉ.तंवर ने बताया कि किसी भी देश के विकास में उसकी संस्कृति का बहुत बड़ा योगदान होता है।  देश की संस्कृति  ही उसके मूल्यों,प्रथाओं,परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का प्रतिनिधित्व करती है।  भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति है । इसे विश्व की सभी संस्कृतियों की जननी कहा गया है।  भारतीय संस्कार और संस्कृति प्राचीन काल से पूर्ण वैज्ञानिक व प्राकृतिक सिद्धांतो से परिपूर्ण रहे हैं।

हमारा  धर्म दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म है। इसका प्रमाण है वेद जो  दुनिया की प्रथम पुस्तक है। धर्म के ज्ञान के बिना सांसारिक जीवन अव्यवस्थित और अराजक होता है। धर्म ने हमारे जीवन को वैज्ञानिक नियमों  में बांधा है जो सभ्य समाज की पहचान है। इसके लिए कुछ कर्तव्य बनाए गए हैं जिनको अपनाकर जीवन को  सफल, सेहतमंद, सुखी,शांतिमय और समृद्धिपूर्ण बनाया जा सकता है। संयम, सदाचार,सहिष्णुता, उदारता , जीओ और जीने दो, प्रकृति पूजा,सादा जीवन उच्च विचार,  संयुक्त परिवार , कर्मवाद, विश्वबंधुत्व व विविधता में एकता हमारी संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं रही हैं।

धर्म हमें कर्त्तव्यपालन सिखाता है,बुरे कर्मों से बचाता है और हमे जिम्मेदार नागरिक बनाता है। धर्म का सानिध्य,  प्रगति का विरोधी नहीं है। धर्म और प्रगति के बीच संघर्ष की नहीं, सामन्जस्य की आवश्यकता है।  मंदिर  हमारे राष्ट्र की अमूल्‍य निधि हैं। वर्तमान में इनके संरक्षण की आवश्यकता है।

आज  अयोध्या में भगवान रामलला विराजमान हुए हैं।  इस ऐतिहासिक शुभ दिन के अवसर पर प्राचीन शिवगंगा मंदिर का जीर्णोधार करने पर मैं भाई सुभाष शर्मा के परिवार जनों को कोटि-कोटि धन्यवाद देता हूं  और इस क्षेत्र की खुशहाली और तरक्की की कामना करता हूं।

इस अवसर पर संस्कृत के प्रकांड पंडित प्राचार्य कौशलदत्त शर्मा, पं.गोपाल शर्मा सहित कई विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रों से विस्तृत पूजा पाठ करके कार्य सम्पन्न करवाकर सभी को शुभाशीर्वाद दिया गया। नीमकाथाना के नंदकिशोर शर्मा सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में  सनातन धर्म प्रेमी कार्यक्रम में सम्मिलित रहे।

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