राजकीय जिला अस्पताल में पांच महीने चल पाई पीपी मोड़ पर सोनोग्राफी जांच, 01 अगस्त को हुई बंद, नतीजा अब मरीजों से बाहरी लैब वाले मनमर्जी से वसूल रहे रकम

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पीएमओ बोलें:- टेंडर प्रक्रिया निकाली हुई हैं जैसे प्रक्रिया पूर्ण होगी, मरीजों को मिलने लगेगा लाभ

नीमकाथाना: जिला नीमकाथाना के आस पास के क्षेत्र में बड़ा जिला अस्पताल होने से आबादी का सर्वाधिक हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में राजकीय कपिल जिला अस्पताल पर निर्भर है। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए जांच की पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। महिलाओं व मरीजों के लिए सोनोग्राफी संबंधित जांच की सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं, वहीं जेब का भार भी बढ़ रहा है।आलम यह है कि नीमकाथाना जिला अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित जांच लैब एक महीने से बंद पड़ी है। ऐसे में यहां होने वाली सोनोग्राफी संबंधित जांचें नहीं हो पा रही है। जिसके कारण मरीजों को महंगे दाम चुकाकर निजी सेंटरो पर जांचे करवानी पड़ रही है।

यहां प्रतिदिन 300 से अधिक सोनोग्राफी जांच
जिला अस्पताल में तकरीबन 10 वर्षों से एक ही सोनोग्राफी मशीन से काम चलाया जा रहा था, वो भी काफी पुरानी होने से अधिकांश समय विजन रिपोर्ट एकुरेसी सही से नहीं दे पाती थी। अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सरकार ने यहां तीन नई सोनोग्राफी मशीन भेजी थी। डॉक्टर नहीं होने से एक मशीन को रींगस अस्पताल में भेज दिया गया। दो मशीनों में एक को सोनोग्राफी कक्ष में शिफ्ट कर रखा है तथा दूसरी डायलिसिस यूनिट में रखी है। ऐसे में मशीन होते हुए भी समस्या जस से तस बनी हुई है। यहां प्रतिदिन करीब 300 से ज्यादा सोनोग्राफी जांच होने की बात सामने आई।

प्रतिदिन 2000 से ज्यादा की हैं ओपीडी
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 2000 से अधिक ओपीडी में तकरीबन 200 महिलाएं सोनोग्राफी जांच के लिए ओपीडी में आती हैं। डॉक्टरों द्वारा जांच लिखने के बाद गर्भवती महिलाएं व मरीज निजी संचालकों के यहां सोनोग्राफी करवाने पहुंचते हैं, लेकिन वहां भी उन्हें लाइन लगाना पड़ता है। साथ ही मुंह मांगी कीमत वसूली जाती है। 

केस नंबर ➊
कजोड़राम सैनी 23 अगस्त को पेट दर्द की समस्या से जिला अस्पताल आया जहां उसे सोनोग्राफी जांच के लिए कहा गया। उसने जांच बाहर निजी सेंटर पर करवानी पड़ी। पीड़ित ने बताया कि पेनसंभोगी हूं। 1000 पेंशन मिलती हैं। बाहर जांच करवाने में मुंह मांगी कीमत वसूली गई।

केस नंबर ➋
कृष्णा देवी पथरी पेट दर्द से जिला अपताल आई, उसकी सोनोग्राफी जांच अस्पताल ने ना होने की वजह से बाहर का रास्ता देखना पड़ा। ऐसे ही रोज कई मरीज सोनोग्राफी जांच को लेकर परेशानी का सामना कर रहे हैं।

सरकार सजग, अस्पताल दे रहा पीड़ा
अस्पताल में जांच करवाने आई गर्भवती महिलाओं ने बताया कि एक तरफ तो सरकार स्वास्थ्य विभाग को लेकर सजग है वहीं दूसरी ओर अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने से सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है। जिससे मरीजों की जेब पर भार पड़ रहा हैं। जिससे मरीजों में खासी पीड़ा हैं।

सोनोलोजिस्ट डॉक्टर ना होने से मशीनें फांक रही धूल
31 दिसंबर 2022 को डॉ. महिपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर चले गए थे। इसके बाद से सोनोग्राफी को लेकर अस्पताल की व्यवस्था बिगड़ गई। एक माह में करीब एक हजार के पार अस्पताल में सोनोग्राफी होती है, जिसमें 200 के पार गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। हालांकि व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए अस्पताल में छह माह का क्रॉस कर आए दो डॉक्टरों ने अस्पताल में ज्वाइन तो कर लिया है, लेकिन अभी तक उनकी दूसरी ओर एग्जाम नहीं हुई है। सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही वह सोनोग्राफी कर पाएंगे। इस कारण जांच के लिए रखी मशीनें पड़ी पड़ी धूल फांक रही हैं। सोनोलोजिस्ट की डिग्री के बिना उनका रजिस्ट्रेशन नहीं होना अस्पताल प्रशासन के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो रही है।

पीपीपी माेड पर संचालित साेनाेग्राफी कक्ष रहता बंद
जिला अस्पताल के सरकारी सोनोग्राफी सेंटर पर कहने को तो सोनोग्राफी मशीनें लगी हुई है, लेकिन एक दस साल पुरानी होने से अधिकांश समय खराब ही रहती है। दूसरी मशीन पर सोनोलोजिस्ट के अभाव में प्रसूताओं व गंभीर मरीजों की सोनोग्राफी नहीं होती है। जिसके कारण सोनोग्राफी कक्ष पर अस्पताल प्रशासन द्वारा ताला जड़ने से सिवाय कोई उपचार नहीं बचा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब दौसो से ज्यादा सोनोग्राफी कराने के लिए मरीज आते हैं।

पांच महीने ही चल पाई पीपीपी
जिला अस्पताल में संचालित दो पीपीपी मोड की सोनोग्राफी मशीनें लगी हुई हैं। जब निशुल्क जांच योजना शुरू हुई तब इन पीपीपी मोड पर सभी मरीजों के लिए निशुल्क जांच होती थी। जिसका खर्च सरकार उठाती थी। करीब पांच महीने से एमआरसी पर गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों की आउटडोर समय में मुफ्त होती है।

इनका कहना हैं
अब अस्पताल प्रबंधन उच्च स्तर से ही टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी। पीपीपी मोड पर फर्म के लिए टेंडर ओपन है। इच्छुक सोनोलोजिस्ट या लैब वालें जैसे ही टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर लेंगे। अस्पताल में जांच फिर से सुचारू रूप से चालू हो जाएंगी। पीपी मोड़ पर चली जांच 1 अगस्त से बंद हैं। लैब वाले ने टेंडर वापस ले लिया था।

डॉ सुमित गर्ग
पीएमओ नीमकाथाना

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