नेवी के सैनिक का मोबाइल ले उड़े बदमाश, पाटन थाने में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं



पाटन। पाटन वाटी क्षेत्र में इन दिनों क्राइम का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ता हुआ जा रहा है, जिस कारण आमजन में भय बना हुआ है। हाल ही में ग्राम पंचायत घासीपुरा के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्राम रैया का बास में बदमाशों ने युवक पर फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया था , इससे पहले मोठूका की नदी में जन्मदिन पर हवा में फायर करना, हाथ में तलवार लहराने का प्रकरण भी सामने आया था। इन दिनों बदमाशों का भय इस कदर बढ़ गया है कि रात के समय की बात तो बहुत दूर की बात है दिन में भी बदमाशों द्वारा घटनाओं को अंजाम दे दिया जाता है। कहने का मकसद बदमाशों में भय नाम की कोई चीज नहीं रही ।16 जून रात साढ़े दस बजे कपिल सिंह पुत्र मोहन सिंह निवासी काचरेडा थाना पाटन दिल्ली जाने के लिए घर से रवाना हुआ था। जिसको कपिल के छोटे भाई देवेश सिंह ने पाटन बस स्टैंड पर छोड़ दिया तथा स्वयं वापस घर चला गया। कपिल कुछ देर बस का इंतजार किया तथा बस के बारे में जानकारी चाही तो किसी ने बताया कि रात को बस  बाईपास होकर ही निकल जाती है, तो कपिल भी बाईपास की तरफ पैदल ही जाने लगा। क्योंकि कपिल जल सेना (नेवी) के सैनिक हैं तथा वर्तमान में इनकी पोस्टिंग सेना भवन दिल्ली में है। पैदल चलते वक्त एक बाइक सवार उसके पास आया जिसने एक टी-शर्ट पहन रखी थी उसने अपनी बाइक रोककर कहा मैं कोटपूतली जा रहा हूं आपको मैं वहां तक छोड़ देता हूं। कपिल उसकी बातों में फस गया तथा उसकी बाइक पर बैठ गया। धांधेला बाईपास पर उस बाइक सवार का साथी उसका इंतजार कर रहा था, उन दोनों ने मौके का फायदा उठाते हुए कपिल को पकड़कर छीना झपटी करने लगे, उसका आईडी कार्ड लेने लगे । कपिल ने दोनों बदमाशों  से मुकाबला करते करते अपने घर पर फोन भी मिला दिया तथा सारी बातें फोन पर बता दी। उधर से कपिल का भाई देवेश वापस पहुंचा तो दोनों बदमाशों ने कपिल का मोबाइल छीन लिया तथा धांधेला की तरफ फरार हो गए। हालांकि कपिल को ड्यूटी जाना था इसलिए एक रिपोर्ट थाने में देकर वह 16 जून की रात को ही दिल्ली चला गया।  परंतु अभी तक पुलिस ने ना तो रिपोर्ट दर्ज की तथा ना ही ऐसे अपराधियों की तलाश की जिसके चलते अपराधियों के हौसले दिन प्रतिदिन बुलंद होते हुए जा रहे हैं और आमजन में भय पैदा हो रहा है। अधिकांश मामले फाईलो  में ही दब जाते हैं। कपिल के पिता मोहन सिंह ने बताया कि मैं स्वयं भी पाटन थाने में आया था परंतु हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई, आखिर पुलिस इस तरह के प्रकरणों को हल्के में लेने से ही क्राइम का ग्राफ बढ़ रहा है। पुलिस के पास अगर किसी प्रकरण के लिए उच्चाधिकारियों का दबाव आता है तो पुलिस सूई तक बरामद कर लेती है, परंतु अधिकारियों ने कोई दबाव नहीं दिया तो सब कुछ गायब होने की संभावना है।
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