नीकाथाना@ शहर में सूदखोरों का मकड़जाल लगातार बढ़ता जा रहा है। खुशहाल जिंदगी के लिए एक बार सूद पर रुपये कर्ज लेने वाले ताउम्र रोना पड़ता है। मजबूरी में तुरंत मिली आर्थिक मदद वर्तमान में उनके लिए श्राप बनती जा रही है।

 शहर में सूदखोरी के दलदल में ऐसे दर्जनों परिवार फंसे हुए हैं। जिनके सूदखोरों के पास खाली चेक, स्टांप व प्लाट की रजिस्ट्री सहित मकान तक गिरवी पड़े हैं। लेकिन, अभी तक उनका ब्याज नहीं चुक रहा। हालत यह है कि वे लोग वर्षों से कमर तोडऩे वाले सूद और ब्याज की चक्की में पिसते रहे हैं। लेकिन कोई समाधान नहीं होता। ऐसा ही मामला कोतवाली थाने में दर्ज हुआ है। जिसमें पीड़ित रोहित कुमार मित्तल पुत्र सुरेश चंद गुप्ता निवासी वार्ड नं 3 ने बताया कि सूदखोर विकास बिजारणिया से कुछ लेन देन किया था जिसका पैसा अदा भी कर दिया। पैसों के बदले स्टाम्प, बैंक चैक गिरवी रखे थे।

गिरवी रखे कागजात वापस लेने सूदखोर में शामिल सुरेन्द्र निवासी अमर शाहपुरा, मोहसिन खान निवासी नीमकाथाना और नवीन कुमार सैनी निवासी नीमकाथाना ने मारपीट कर धमकी भी दी गई। उन्होंने कहा कि दोनों भाइयों को मार डालेगे व झूठे मुकदमे लगा कर फसवा देंगें। 

सुरेन्द्र यादव द्वारा धमकी देने की रिकोर्डिग भी है। जिसमें चैक और स्टाम्प लौटाने के लिये मना कर दिया। मारपीट करने वाले नवीन कुमार सैनी के पास सोना जो लगभग 9 लाख रुपये लागत का है जो पैसे के बदले में मुथूट फाइनेंस व आइसीआइसीआई बैंक पर लोन पर रख दिया। 

सूदखोरों के लोगों से परिवार को जान माल का खतरा भी है। जिसपर पुलिस ने धारा 341, 323, 506, 420, 406 में मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच के जुटी हुई है।

बैंकों में आठ साल में दोगुना लेकिन सुद का पैसा एक साल में हो जाता है दोगुना

सूदखोरी का गणित कुछ ऐसे समझिए कि बैंक में जमा किया गया धन भले ही आठ साल में दोगुना होता हो लेकिन सूदखोर जो रुपये देता है वह सिर्फ एक साल में दोगुना हो जाता है। यानी साल भर में मूल रकम के बराबर एक और रकम तैयार हो जाती है।

सूदखोरों के खेल में ज्यादातर ऐसे लोग फंसते हैं जो ऊपर तक अपनी आवाज नहीं पहुंचा पाते हैं। इनसे वसूली करना सूदखोरों के लिए कोई मुश्किल काम नहीं होता है। पर ऐसा नहीं है कि सिर्फ निचले तबके के ही लोग सूदखोरों के पास जाते हैं, उच्च वर्ग के लोग भी विलासितापूर्ण जीवन के लिए सूदखोरों से रुपये कर्ज लेते हैं और बाद में चुकाते-चुकाते खुद बदहाल हो जाते हैं।


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