नीमकाथाना। सभी जन सुखी एवं स्वस्थ बने रहे इन्हीं हितों को लेकर राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विकासशील योजनाओ पर करोड़ों रुपए खर्च राज कोष से खर्च किया जा रहा है। बावजूद इसके व्यवस्था की देखरेख एवं उत्तरदायित्व करने वाले कार्मिक अधिकारीयो की लापरवाही व मनमानी के चलते सरकार की मनसा को ठेस पहुंचा रहे हैं। शहर के राजकीय कपिल चिकित्सालय में सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री निशुल्क दवा वितरण व्यवस्था जैसी योजनाओं पर गंभीर सवालिया अंगुलियां उठ रही है।

चिकित्सालय में स्थिति निशुल्क दवा वितरण केंद्रों पर कार्यरत कार्मिक मनमर्जी से अस्पताल में आने वाले मरीजों को निशुल्क दवाइयां मिलने में परेशानी हो रही है। 

निशुल्क दवा केंद्रों पर कार्यरत कर्मचारी मरीजों को दवा देने के बजाय टरकाने का कार्य कर रहे हैं। जिसका एक उदाहरण संवाददाता को बुधवार को राजकीय मुख्य कपिल चिकित्सालय में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा सेवा केंद्र पहुंचने पर देखने को मिला। 

पीड़ित पंजीकृत रोगी चिकित्सा परामर्श दवा पर्ची लेकर काउंटर पर पहुंच रहे थे, तैनात भर्ती फार्मासिस्ट पर्ची को यह कहकर लोटा रहा था कि इस काउंटर पर चिकित्सालय में भर्ती लोगों को दवा दी जाएगी, दूसरी दुकान जा कर दवा लो ! यह कहकर वहाँ पहुंच रहे रोगीयो को गुमराह किया जा रहा था। 

चिकित्सालय परिसर में पीड़ित मरीजों को परेशान होते देख कर मामले को लेकर संवाददाता द्वारा मौके पर ही फोन से कपिल चिकित्सा मुख्य प्रभारी अधिकारी डॉ जी.एस. तँवर को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा काउंटर पर उपस्थित फार्मासिस्ट द्वारा दवा देने में मनमानी पर बात करवाई तो नियम कहकर दवा नहीं देना कहा। बाद में प्रभारी अधिकारी की मिली लताड़ पर उसने दवा पर्ची से दवाई दी गई। 

चिकित्सालय फार्मासिस्ट की मनमर्जी मरीजों की जेब पर है भारी

उपखंड के मुख्य चिकित्सालय केंद्र प्रांगण में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा वितरण काउंटर खोले गए हैं जहां पर सरकार द्वारा रोगी संख्या अनुपात में दवाइयां पहुंचाजाई जा रही है। लेकिन निशुल्क दवा केंद्रों पर कार्यरत फार्मासिस्ट की मनमर्जी लापरवाही के चलते सरकार की योजना का लाभ मरीजों को मिल ही नहीं रहा है। 

अब सवाल यह उठता है क ग्रामीण अंचलो से पहुंचने वाले बीमार मरीज ना समझी के चलते निजी व्यावसायिक दवा मेडिकल दुकान पर पहुंच रहे हैं , जहां मुख्यमंत्री दवा वितरण काउंटर फार्मासिस्ट संचालक की मनमर्जी का खामियाजे से लोगों की जेब पर सीधा-सीधा पड़ रहा है, अब ध्यान में लाने बाद भी इस प्रकार मनमानी पर अंकुश नहीं होता है तो ऐसे अधिकारी कार्मिक व्यवस्था की धज्जियां तो उडा ही रहे हैं,  इसके साथ ही सरकार की इच्छा शक्ति से आमजन की खुशहाली के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर भी अपनी कार्यशैली प्रभावित की जा रही है। 

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