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रैला - माईनिंग जोन का रास्ता राजनैतिक दबाव के चलते हुआ बन्द


पाटन- क्षेत्र में लगे क्रेशर प्लांटो पर जाने वाले  रास्ते अधिकांश सवाईचक , गौचर व वन भूमि से होकर निकल रहे है परन्तु वन विभाग द्वारा हसामपुर से रैला जाने वाले रास्ते को कभी बन्द करते है कभी शुरू करते है यह सारा खेल राजनैतिक दबाव के कारण ही खेला जा रहा है। हसामपुर से रैला जाने वाला रास्ता ग्रामीणो के अनुसार सैकडो साल पुराना रास्ता है तथा इस रास्ते पर वन विभाग की तकरीबन साढे 400 फुट जमीन बताई जा रही है जिसपर विभाग द्वारा किसी तरह का कोई प्लांटेशन नही किया गया तथा किसी तरह के वहा पेड नही लगे है । 
वाहनो का आवागमन  भी इस रास्ते से हो रहा है। उसके बावजूद भी वन विभाग के अधिकारी कभी इस रास्ते को बन्द करते है तो कभी इसको शुरू कर देते है। इस रास्ते पर प्राचीन मन्दिर बारांधूनी के नाम से स्थित है तथा मन्दिर के बडे सन्त गौ पालन करते है जिनका चारा फूस भी इसी रास्ते से जाता है। यही नही किशोरपुरा में स्थित के्रसर प्लांट एंव माईनिंग जोन पर जाने का रास्ता भी वन भूमि से होकर निकल रहा है परन्तु वन विभाग के अधिकारियो द्वारा उस रास्ते को अवरूध नही किया।
 इस पर विभागिय अधिकारियो पर भी सवालिया निशान लग रहे है। भीतरो , केसर , मीणा की नांगल सहित दर्जनो ऐसे गांव है जहां माईनिंग द्वारा लीज स्वीकृत है तथा यहां जाने के लिए वन भूमि की जमीन से होकर जाना पडता है। इस बारे में विभागिय अधिकारियो से पुछे जाने पर  उनका कोई जबाब नही मिलता । लोगो का कहना है कि विभागिय अधिकारियो की जेब में जब कुछ चला जाता है तो रास्ता शुरू हो जाता है ओर जब खनन करने वाले लोग उनकी जेब में कुछ नही डालते तो रास्ता बन्द हो जाता है। रैला माईनिंग जोन में राजनैतिक एंव प्रशासनिक क्षेत्र से जुडे कई अधिकारियो की लीज होने के कारण रैला का रास्ता हमेशा सुर्खियों में रहता आरहा है।
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