विज्ञापन...

महबूबा सरकार गिरी, क्या अब कश्मीरी पंडितों के बारे में होगा कोई फैसला ?

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में तीन साल से चली आ रही पीडीपी-बीजेपी गठबंधन की सरकार 19 जून को तब गिर गई, जब बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। सरकार गिरने के बाद कश्मीर में राज्यपाल शासन लग गया है। इस बारे में लगातार बात हो रही है कि घाटी के हालात अब किस तरफ जाएंगे। ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि घाटी से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की तीन दशक से चली आ रही घर वापसी की मांग पर गठबंधन सरकार के दौरान कितना काम हुआ और सरकार गिरने के बाद कश्मीरी पंडितों के बारे में कोई फैसला होगा या नहीं?

महबूबा सरकार गिरने के बाद क्या कश्मीरी पंडितों के बारे में कोई फैसला होगा?

कश्मीरी पंडितों के लिए संघर्ष करने वाले संघटन पनुन कश्मीर के अध्यक्ष अश्वनी चरंगू का मानना है, “ मौजूदा हालात में सरकार का ध्यान घाटी के हालात सामान्य करने पर होगा। उनकी प्राथमिकता में कश्मीरी पंडित सबसे ऊपर नहीं होंगे। लेकिन हमारी मांगों में कश्मीरी पंडित सबसे ऊपर रहेंगे।”

क्या है कश्मीरी पंडितों का हाल

1989-90 में जब देश में राम मंदिर आंदोलन का जोर था, उस समय कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों पर आतंकवाद का कहर टूटा और बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर चले आए। तब से कश्मीरी पंडितों को लेकर भले ही अन्य मंचों पर चर्चा होती रही हो, लेकिन 2018 में देश की संसद के दोनों सदन लोक सभा और राज्य सभा में कश्मीरी पंडितों की हालत के बारे में किसी सांसद ने सवाल नहीं उठाया।

इस बारे संसद में अंतिम सवाल सितंबर 2017 में पूछा गया था। अगस्त 2017 में लोकसभा में सरकार ने बताया कि 1990 के दशक में घाटी में उग्रवाद शुरू होने के बाद से बड़े पैमाने पर कश्मीरी पंडितों का घाटी से पलायन हुआ। इस समय करीब 62,000 कश्मीरी पंडित परिवार जम्मू, दिल्ली और देश के अन्य राज्यों में रह रहे हैं। इनमें से 40,000 परिवार जम्मू और 20,000 परिवार दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं।

हर कश्मीरी विस्थापित मिलती हैं ये सुविधाएं

9 अगस्त 2016 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के बाद से उन्हें राहत पहुंचाने की लिए सरकारें विभिन्न उपाय करती रही हैं।

उन्होंने बताया कि कश्मीरी पंडित विस्थापितों को प्रति व्यक्ति 2500 रुपये प्रतिमाह की नकद राहत राशि दी जाती है। इसके अलावा हर परिवार के हर व्यक्ति को हर महीने 9 किलो चावल, एक किलो चीनी और दो किलो आटा दीया जाता है।

राजनाथ ने बताया की प्रधानमंत्री राहत पैकेज 2004 के तहत जम्मू में 2 कमरे वाले 5242 आवास और शेखपुरा बडगाम में 200 फ्लैट बनाए गए हैं। इसके बाद 2008 के प्रधानमंत्री राहत पैकेज के तहत 1917 विस्थापित युवकों को राज्य सरकार में नौकरी दी गई।

नौकरी पाए लोगों के रहने के लिए 505 अस्थायी निवास भी बनाए गए। यह दोनों काम यूपीए सरकार के दौरान के थे। मोदी सरकार ने 7 नवंबर 2015 को विस्थापितों को राज्य सरकार में 3,000 नौकरियां देने की घोषणा की थी। इसके अलावा 6,000 अस्थायी आवास बनाने की भी घोषणा की गई। कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन के बाद से सन 2016 तक कश्मीरी पंडितों के राहत और पुनर्वास पर सरकार करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।

Post a Comment

Cookie Consent
We serve cookies on this site to analyze traffic, remember your preferences, and optimize your experience.
Oops!
It seems there is something wrong with your internet connection. Please connect to the internet and start browsing again.
AdBlock Detected!
We have detected that you are using adblocking plugin in your browser.
The revenue we earn by the advertisements is used to manage this website, we request you to whitelist our website in your adblocking plugin.