तथ्यात्मक रिपोर्ट में पुलिस ने नहीं माना धारा 307 का आरोप, एडीजे कोर्ट में 15 आरोपियों के तीन जमानत आवेदनों पर पूरी हुई बहस

नीमकाथाना- भारत बंद के दौरान उपद्रव मचाने के आरोप में गिरफ्तार 15 आरोपियों की तरफ से अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश के यहां तीन जमानत आवेदन पेश हुए। उसमें खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस पर जबरन उठाकर गिरफ्तार करने के आरोप लगाए गए हैं।


बुधवार को जमानत आवेदन पर बहस हुई। अपर लोक अभियोजक ने तोडफ़ोड़ व आगजनी की घटना में शामिल आरोपियों को जमानत देने का विरोध किया। घटना में एएसपी धनपत राज सहित कई पुलिस अधिकारी व जवान घायल हुए थे।

पुलिस ने इस मामले में 23 लोगों को गिरफ्तार किया था। प्रकरण में 150 लोगों को नामजद कर चार- पांच हजार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट में पुलिस की तरफ से तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश हुई। इसमें जमानत कराने वाले आरोपियों को धारा 307 का अपराधी नहीं माना गया। एडीजे गोविंद वल्लभ पंत ने जमानत बहस सुनने के बाद फैसला 11 मई तक सुरक्षित रखा है।

15 लोगों के तीन जमानत आवेदन

सबजेल में बंद 15 आरोपियों की तरफ से एडीजे कोर्ट में जमानत के तीन आवेदन पेश हुए। वकीलों ने कहा, सभी लोग निर्दोष हैं। पुलिस ने गलत तरीके से लोगों को बंद किया है। सबजेल में एक महीने से ज्यादा वक्त होने को जमानत का आधार बनाया गया है।

शिक्षक व प्रोफेसर भी बंद हैं मामले में :

एससी-एससी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में हुए भारत बंद के दौरान नीमकाथाना में तोडफ़ोड़ व आगजनी की घटना हुई। पुलिस ने अलग-अलग प्रकरणों में 23 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें कॉलेज प्रोफेसर व शिक्षक भी शामिल हैं।

सभी आरोपी पिछले एक माह से सब जेल में बंद हैं। तीन लोगों के जमानत आवेदन पूर्व में कोर्ट ने खारिज कर दिए थे। दलित संगठनों ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मिलकर उपद्रव हिस्सा नहीं लेने वालों की गिरफ्तारी पर रोक की मांग की थी। फिलहाल गिरफ्तारियां रुकी हुई हैं।

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