पहली बार एेसा मामला शेखावाटी इंजीनियरिंग कॉलेज, डूंडलोद के आठवें सेमेस्टर के 56 विद्यार्थियों को नहीं बैठने दिया था परीक्षा में

सीकर न्यूज़- शेखावाटी इंजीनियरिंग कॉलेज डूंडलोद के 56 स्टूडेंट्स को गुरुवार को बीटेक की परीक्षा से बाहर कर दिया गया। राजस्थान टेक्नीकल यूनिवर्सिटी कोटा का तर्क था कि उनके कॉलेज ने 2.45 लाख रुपए की फीस नहीं भरी। स्टूडेंट्स आक्रोशित हो गए और हाईवे जाम करने लगे।

इसके बाद शेखावाटी इंजीनियरिंग कॉलेज ने 2.45 लाख रुपए जमा कराए। उसके बाद इन छात्रों की परीक्षा अलग से करवाई गई।

ऐसा गंभीर मामला पहली बार सामने आया है। कॉलेज के छात्रों का एग्जाम सेंटर सोभासरिया इंजीनियरिंग कॉलेज था। यहां बीटेक के आठवें सेमेस्टर की परीक्षा का समय सुबह 10.30 बजे निर्धारित था। परीक्षार्थी कॉलेज में प्रवेश करने वाले थे।

इसी बीच आरटीयू ने सोभासरिया कॉलेज को फोन किया कि शेखावाटी इंजीनियरिंग कॉलेज, डूंडलोद की फीस बकाया है, इसलिए इनके स्टूडेंट्स को शामिल नहीं किया जाए। एग्जाम सेंटर ने आरटीयू से लिखित में मांगा। बाद में यूनिवर्सिटी ने ईमेल भेजा। एग्जाम सेंटर पर इन छात्रों को बाहर कर दिया।

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स्टूडेंट्स बोले : तीन घंटे की जगह दो घंटे का समय ही दिया, पेपर ड्यू रहने की आशंका 

छात्र दिनेश कुमार, हरपालसिंह, अमित शर्मा, अशोक, विजय जांगिड़, सुरेंद्र आदि ने आरोप लगाते हुए कहा कि हमें पौने एक बजे परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया। इसके बाद 12 मिनट का समय प्रश्नपत्र, कॉपी बांटने सहित अन्य खानापूर्ति में लग गया।

सभी विद्यार्थियों से तीन बजे कॉपियां ले ली गई। ऐसे में हमें परीक्षा में निर्धारित तीन घंटे की जगह मात्र दो घंटे का समय ही मिला। कई सवाल हल नहीं कर पाए। हमारी कोई गलती नहीं होने के बावजूद भी पेपर ड्यू रहने की आशंका बढ़ गई है। समय कम दिया है तो बोनस अंक दिए जाने चाहिए।

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दोनों कॉलेजों ने कहा-परीक्षा के लिए पूरा समय दिया 

सोभासरिया इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसके राठी का कहना है कि आरटीयू का लिखित आदेश आया था। इसलिए स्टूडेंट्स को परीक्षा में नहीं बैठाया। आदेश आने पर हमने सभी को परीक्षा दिलवाई। परीक्षा के दाैरान पूरा समय दिया है।

राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी कोटा के परीक्षा नियंत्रक डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि शेखावाटी इंजीनियरिंग कॉलेज डूंडलोद के 2.45 लाख बकाया थे। फीस जमा करवाने के बाद परीक्षा में शामिल कर लिया गया था।

शेखावाटी इंजीनियरिंग कॉलेज डूंडलोद के निदेशक शीशराम रणवां का कहना है कि आरटीयू को गलतफहमी हो गई थी। इस कॉलेज के काेई पैसे बाकी नहीं थे। पुराने इंस्टीट्यूट के 90 हजार रुपए बाकी थे वो भी हमने जमा करवा दिए थे। विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए पूरा समय दिया गया था।

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