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गणेश्वर में अज्ञात वाहन की चपेट में आने से जरख की मौत, देखने लोगों की भीड़ जुटी

गणेश्वर में पहाड़ी से उतरकर सड़क पर आया था जरख, ग्रामीणों ने पैंथर समझा, देखने लोगों की भीड़ जुटी 

नीमकाथाना- गणेश्वर की ढाणी बडवाला में मंगलवार सुबह एक मृत जरख मिला। आशंका है उसकी मौत किसी वाहन की चपेट में आने से हुई है। जरख जंगल से निकलकर सड़क पर आ गया था। मृत जरख को लोगों ने पैंथर समझ लिया। उसे देखने भीड़ जमा हो गई।
ग्रामीणों ने मामले की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम में शामिल अधिकारियों ने जरख होने की पुष्टि की। वन विभाग के कार्मिक जरख को यहां लेकर आए। डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम किया। उसके बाद उसे जला दिया गया।

रेंजर देवेंद्रसिंह राठौड़ ने बताया कि सुबह ग्रामीणों ने मृत जरख को रोड पर पड़ा देखा। कोई हलचल नहीं हुई तो नजदीक जाकर देखा। वह मृत हालात पड़ा था। डॉक्टरों के मुताबिक जरख की की मौत हादसे में हुई है। हादसे के जख्मी जरख को गहरा सदमा लगा। इसी से उसकी मौत हो गई।

इधर, मृत पैंथर की सूचना पर दूर-दराज के लोग भी बड़ी तादाद में यहां पहुंच गए। पानी की तलाश में आबादी में आते रहे वन्यजीव गर्मी शुरू होते ही जंगल के जानवर आबादी में आने लगे है।

वन्यजीव पानी की तलाश में आबादी में आते है

हालांकि जंगल में विभाग ने कई जगह पानी के पॉइंट बना रखे है। लेकिन इनके पानी वाले पॉइंट अधिकांश समय सूखे ही रहते है। इसके लिए विभाग के पास बजट भी पर्याप्त नहीं आता है। ऐसे में भामाशाह के सहयोग से पानी डलवाते है। ये गांव प्रभावित: वन्यजीवों से दर्जनों गांव ढाणियों के लोग परेशान है।

गणेश्वर व बालेश्वर वन क्षेत्र के ग्रामीणों का जंगल के हिंसक जानवरों से कई बार सामना होता है। स्यालोदड़ा, डाबला, ईमलोहा, मावंडा कला, भूदोली, टाेडा में कई बार पैंथर परिवार दिखाई दिया है। पहाड़ी इलाके की ढाणियों में वन्यजीव बकरियों का शिकार कर लेते है। महावा में तो एक महिला पैंथर से भिड़ गई थी।

32 हजार हैक्टेयर में फैला है जंगल, एक दर्जन से ज्यादा पैंथर

 नीमकाथाना वन क्षेत्र 32 हजार हैक्टेयर में फैला हुआ है। इनमें से 13 हजार 268 हैक्टेयर इलाका पाटन में आता है। यहां एक दर्जन से ज्यादा पैंथर है।

इसके साथ ही जरख, सियार, बारहसिंगा जैसे अन्य जानवर भी है। सड़क पर आने से कई जानवर अकाल मौत मरते है। अजीतगढ़ में पैंथर की सड़क पर आने से मौत हुई थी।

ग्रामीणों के मुताबिक अभयारण्य की योजना लागू होने से ही जंगल के जानवर सुरक्षित रह सकते है।

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