श्रीमाधोपुर: नाथूसर गाँव में गत मंगलवार को एक महिला ने फांसी लगाकर जान दे दी। माँ की ममता भी पिघली और उसने मात्र चार महीने के मासूम को सोता छोड़कर फांसी के फंदे पर झूल गई।

4 महीने के दुधमुहे मासूम को सोता छोड़ माँ ने फाँसी लगाकर दी जान
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फाँसी लगाने के कारणों  का अभी पता नहीं चल सका है। मृतका के ससुराल पक्ष के लोगो का कहना है कि पूनम की मानसिक स्थिति कुछ दिनों से ठीक नहीं थी।

पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर श्रीमाधोपुर सीएचसी की मोर्चरी में पोस्टमार्टम के लिए रखवाया है। चार महीने के दूध पीते बच्चे को इस तरह छोड़कर जाना इस तरह पूरे घर में कोहराम मचा रखा है।

मृतका 35 वर्षीय पूनम पत्नी बलबीर प्रसाद नायक है। मृतका के जेठ कांताप्रसाद व ससुर जगदीश नायक के मुताबिक वे दोनों सुबह घर पर नहीं थे। घर पर केवल मृतका की सास ही थी। मृतका का पति बलबीर भी दिल्ली में एक निजी दुकान पर नौकरी करता है। पूनम ने कमरे में चुन्नी के फंदे से फांसी लगा ली।

जब उसके चार माह के बच्चे के रोने की आवाज आई तो सास नानची देवी व पड़ोसियों देखा ताे पूनम का शव कमरे की छत के लोहे की गाटर से झूलता मिला। वहीं मासूम बिलख रहा था। पुलिस के अनुसार मृतका के पीहर पक्ष के आने के बाद शव का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराया जाएगा।

तीन दिन पहले ही दिल्ली से आई थी ससुराल

नाथूसर के बलबीर प्रसाद नायक की आठ साल पहले 26 जनवरी 2009 को दिल्ली निवासी पूनम से शादी हुई थी। इन दोनों के चार माह का एक पुत्र है। मृतका के ससुर जगदीश व जेठ कांताप्रसाद का कहना है कि शादी के बाद से ही पति व पत्नी दिल्ली रहने लगे थे। शनिवार को ही बच्चे की मालासी की जात देने के लिए दोनों पति-पत्नी नाथूसर गांव आए थे। पूनम की मानसिक हालत सही नहीं थी। रविवार को उसने ससुराल रहने की ही जिद की तो बलबीर रविवार को उसे ससुराल छोड़कर अकेला दिल्ली चला गया। पूनम जेठानी व ससुर से लड़ने व झगड़ने लगी तथा मानसिक हालत सही नहीं होने से पूरी रात परिजनों को उसने सोने नहीं दिया।

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