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राजकीय कपिल अस्पताल को टेलीमेडिसिन सेवा की मिली सौगात

नीमकाथाना: राजकीय कपिल अस्पताल को केंद्रसरकार के डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के तहत टेलीमेडिसिन सेवा की सौगात मिली है। इससे मरीजों को बेहद ही कम समय में बेहतर एक इलाज की सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के तहत अस्पताल को जयपुर के सेंट्रल सर्वर से जोड़ा गया है। इससे मरीजों को जयपुर में बैठे विशेषज्ञ डॉक्टर परामर्श सेवाओं के लिए सीधे वीडियो कॉन्फ्रेंस प्रणाली के जरिए मिल सकेंगे।
राजकीय कपिल अस्पताल को टेलीमेडिसिन सेवा की मिली सौगात
source- google images

अस्पताल में मरीज से इलाज परामर्श के लिए पहले पंजीयन करवाया जाएगा। ऑनलाइन डिजिटल डिस्पेंसरी सॉफ्टवेयर से रोगी का एक बायोडाटा भी तैयार होगा। सेंटर पर मरीज को सुबह आठ से शाम आठ बजे पुरे 12 घंटे तक इलाज की सुविधा मिलेगी। टेलीमेडिसिन सेंटर को सीधा जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल से जोड़ा गया है।

आखिर है क्या टेलीमेडिसिन चिकित्सा सेवा

टेलीमेडिसिन सेवा एक तरह की ऑनलाइन चिकित्स्या पद्द्ति है। आसान शब्दों में आपको समझाए तो कई बार क्या होता है कि यहाँ के डॉक्टर से कई बार इलाज करवाने के बाद भी आपको आराम नहीं मिलता है। फिर आप सोचते है इस बार तो जयपुर या सीकर किसी बड़े डॉक्टर को दिखा कर आएंगे। टेलीमेडिसिन सेवा से अब आपको जयपुर जाने की जरुरत नहीं है वहाँ के डॉक्टर आपको यहीं दवाई उपचार बता देंगे।

जयपुर के विशेषज्ञ चिकित्सक इलाज के दौरान डॉक्टर जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ टेलीमेडिसियन सेंटर से सस्ता इलाज दे सकेंगे। सेंटर पर मौजूद उपकरणों की मदद से विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज की जांच रिपोर्ट ऑनलाइन देख सकेंगे। मरीज नोडल के माध्यम से डॉक्टर से परामर्श कर दवाओं के लिए उचित राय जान सकेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक़ ई-स्वास्थ्य सुविधा में स्कीन एवं वीडी, स्त्री रोग, यूरोलॉजिस्ट, जनरल फिजिशियन, गैस्ट्रोएंट्रोलजिस्ट विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध रहेगी। कपिल अस्पताल के टेलीमेडिसिन सेंटर पर डिजिटल ईसीजी, बीपी उपकरण, स्टेथोस्कोप,  स्केनर, पल्स ऑक्सीमीटर, डर्मोस्कोप आदि आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

वर्तमान में और भी काम अधूरे पड़े हैं 

आज वह जमाना नहीं रहा कि लोगों को जितना उपलब्ध हो उसी में संतुष्टि कर ले। जमाना बदल रहा है , देश और समाज की बागडोर युवाओं के हाथ में आ चुकी है। जोकि अपने अधिकारों की गुहार नहीं बल्कि हक से मांगने भी जानते हैं। सरकार को भी अब आदत पड़ चुकी उस लकीर को छोड़ना होगा और अपने सिस्टम को बदलना होगा।

लाखों रुपए से बने कपिल अस्पताल के भवन में होती है केवल मरहम पट्टी 

भामाशाह दौलत राम गोयल ने अपनी मां पुष्पावती गोयल की याद में करीब 65 लाख रुपए की लागत से राजकीय कपिल अस्पताल में आलीशान भवनों बनवाकर, उसमें मरीजों के उपचार के लिए लाखों रुपए की मशीनें रखवाई। ताकि अस्पताल में उपचार आसानी से संभव हो सके। लेकिन वर्तमान में आपातकालीन की हालत यह हो रही है कि इसमें रखी मशीनें धूल फांक रही है। तो वहीँ  वातानुकूलित बन रहे रूम स्टाफ के रेस्ट करने के काम आ रहा है।

वर्तमान में सरकार मरीज के इलाज की चिंता छोड़कर आपातकालीन भवन में खड़ी समस्याओ का इलाज करे। बाद में मरीजों का इलाज करने में और भी सुगमता होगी।

अगर आपातकाल का आंकड़ा उठाकर देखा जाए तो हर माह है करीब 1300 के लगभग मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं, लेकिन वहां पर चिकित्सक बिना संसाधनों के कारण हादसे में घायल होकर आने वाले मरीजों के केवल मरहम पट्टी का जयपुर या सीकर रैफर करने को मजबूर होते हैं।

अस्पताल में आंकड़े बताते हैं की वर्ष 2017 में जनवरी से लेकर जुलाई माह तक कुल 7461 मरीज आपातकालीन में आ चुके हैं। इसके बावजूद सरकार अस्पताल के आपातकालीन ट्रॉमा में सेंटर में तब्दील करने की कोई रुचि नहीं ले रही है।

अब तक 300 इस लोगों की मौत

आपातकालीन में लगभग 344 लोगों की मौत हो चुकी है इसके बावजूद भी विभाग अस्पताल पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

सरकार की भलाई भी इसी में है कि वह यूथ का साथ दें और उनको हो रही समस्याओ का हल निकालते हुए उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। देश का हर नागरिक बदल रहा है ऐसे में सरकार सरकार को भी चाहिए कि पहले वाली परिपाटी छोड़कर वर्तमान में जिये।

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