राजकीय अवकाश दिवस में रातों-रात चबूतरा, सुबह मूर्ति अनावरण
नीमकाथाना। शहर के रामलीला मैदान से सटे मुख्य सड़क चौराहे पर सरकारी भूमि पर महाराजा अग्रसेन की मूर्ति और चबूतरा स्थापित किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस संबंध में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी तथा नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों द्वारा दिए गए ज्ञापन के अनुसार संबंधित स्थल सार्वजनिक निर्माण विभाग के रिकॉर्ड में सड़क के रूप में दर्ज है, जो आमजन आवागमन और आपातकालीन उपयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 31 जनवरी की रात चबूतरे का निर्माण किया गया और 1 फरवरी 2026 को प्रातः लगभग 10:15 बजे मूर्ति का अनावरण कर दिया गया।
सार्वजनिक भूमि पर स्थायी संरचना का विरोध
सामाजिक कार्यकर्ता मनीराम यादव ने बताया कि सार्वजनिक सड़क और सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार की स्थायी संरचना या मूर्ति की स्थापना सर्वोच्च न्यायालय के उन स्पष्ट निर्देशों के विरुद्ध है, जिनमें सार्वजनिक स्थलों पर नई धार्मिक या सांस्कृतिक संरचनाएँ स्थापित न किए जाने संबंधी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यादव ने बताया कि इस प्रकार का निर्माण भविष्य में यातायात व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
यह आस्था नहीं, कानून का विषय
सामाजिक कार्यकर्ता जुगल किशोर ने बताया कि यह किसी आस्था विशेष का विरोध नहीं बल्कि सार्वजनिक भूमि की रक्षा और विधि-राज के पालन से जुड़ा मामला है। उनका तर्क है कि यदि किसी प्रकार की स्थापना की जानी है तो उसकी विधिक अनुमति, पारदर्शिता और प्रशासनिक स्वीकृति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट निर्णयों का हवाला
ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए अधिवक्ता हरीश देवंदा ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक या सांस्कृतिक संरचनाओं की स्थापना पर प्रतिबंध संबंधी निर्देश पूर्व में जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ऐसे निर्माणों को नहीं रोकता या हटाता है तो यह न्यायालयीय आदेशों की अवमानना की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
यह है प्रमुख मांगे
ज्ञापन में प्रशासन से मांगें की गई हैं कि सड़क पर स्थापित मूर्ति एवं चबूतरे को तत्काल प्रभाव से हटाया जाएँ। स्थापना की अनुमति देने वाले कथित आदेशों की वैधानिकता की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएँ। भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्पष्ट प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा: भाकर
शशिपाल भाकर ने कहा कि यह मामला केवल स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, न्यायालयीय आदेशों के पालन और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। भाकर ने बताया कि इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।
इनका कहना है
अतिरिक्त जिला कलेक्टर भगीरथ साख ने कहा कि मामले में संबंधित विभागीय दस्तावेज मंगवाकर जांच कराई जाएगी। जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
यह लोग रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान महेंद्र बिजारणियां, सुमन सामोता, इंदु सिंह, राजेश मंगवा, हंसराज किलानियां, कमल नयन महरानियां, विकास, रामचंद्र सहित अनेक नागरिक उपस्थित रहे।




