मौसमी बीमारियों की रोकथाम में आयुर्वेद कारगर उपाय : डॉ शर्मा

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नीमकाथाना। स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना रोगी व्यक्ति के रोग की चिकित्सा कर उसके रोगों को शांत करना ही आयुर्वेद का सिद्धांत है। राजकीय आयुर्वेद औषधालय गणेश्वर के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी कम ब्लाक आयुर्वेद अधिकारी डॉ प्रदीप शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद के मतानुसार बताए गए आहार-विहार, आचार विचार, रहन-सहन, दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋतु चर्या का पालन कर व्यक्ति स्वस्थमय, सुखमय एवं खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकता है।
वर्तमान में मौसम परिवर्तन के कारण मौसमी बीमारियों का घर घर में प्रकोप चल रहा है। आयुर्वेद सिद्धांत के अनुसार वात पित्त कफ यह शरीर में तीन दोष बताए गए हैं इनका घटना या बढ़ना ही रोग है। वर्तमान मे वर्षा ऋतु खत्म होकर शरद ऋतु प्रारंभ हो रही है जिसके कारण पित्त दोष का प्रकोप हो रहा है। आयुर्वेद मतानुसार शरीर में पित्त को अग्नि स्वरूप माना गया है अर्थात इस समय शरीर में अग्नि तत्व की प्रधानता होने से ज्वर अर्थात बुखार एवं अम्लपित्त इत्यादि पैत्तिक रोग एवं उल्टी, दस्त, पेट दर्द, जी मिचलाना, पेट भरा भरा रहना, भूख नहीं लगना आदि रोग आमजन को हो रहे हैं। इसके अलावा वर्षा ऋतु के कारण मच्छरों का विशेष प्रकोप रहता है। इसके चलते मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि मच्छर जनित रोग भी हो रहे हैं। विशेष रूप से डेंगू मलेरिया ज्यादा ही फैल रहा है। इन सब रोगों की रोकथाम हेतु आयुर्वेद मतानुसार स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर स्वस्थ रह सकते हैं तथा बीमार होने पर आयुर्वेद की निर्दोष एवं निरापद वस्तुओं का सेवन कर हम रोगमुक्त भी हो सकते हैं। आयुर्वेद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली औषधि जैसे अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, कालमेघ, आंवला, हल्दी, सोंठ, काली मिर्च, दालचीनी, नींबू आदि का इस मौसम में आम व्यक्ति को सेवन करना चाहिए। इस मौसम में पित्त को बढ़ाने वाली वस्तुओं का सेवन करने से बचना चाहिए। यथा आचार, इमली, अमचूर, राई की चीजें, गरम मसाला इनका प्रयोग कम से कम करना चाहिए।
मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय:-
 1. 250 ग्राम पानी में तुलसी की पत्ती 5 नग, नीम की पत्ती 1 नग, सौठ चूर्ण चौथाया चम्मच, मुलेठी चूर्ण चौथाया चम्मच, काली मिर्च पांच नग, गिलोय का डंठल 3 इंच, अडूसा एक पत्ता इनको डालकर मंद मंद अग्नि पर अच्छी तरह उबालें जब चौथाया याने 50 ग्राम रह जाए तो इच्छा अनुसार सेंधा नमक या गुड़ डालकर पी लें। वर्तमान में जो आम मौसमी बीमारी जुखाम, खासी, बुखार पेट जनित व्याधिया चल रही हैं उन से निश्चित रूप से बचाव संभव है।
2.यदि बुखार, जुकाम, खांसी पेट के विकार हो रहे हैं तो गिलोय घनवटी, महासुदर्शन घन वटी, दो-दो गोली इस ऊपर बताए हुए क्वाथ से सुबह-शाम ले तथा रात को चौथाया चम्मच हल्दी चूर्ण दूध में डाल कर लेना है।
3. गर्म पानी में हल्दी या नमक डालकर प्रतिदिन सुबह-शाम गरारे भी करें।
इसके अलावा मच्छरों से होने वाले डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया आदि रोगों की चिकित्सा एवं बचाव के उपाय:-
1. नीम या सरसों के तेल में नीम की पत्तियों को कूटकर उस की लुगदी की टिकिया सी बनाकर मंद अग्नि पर तेल में जैसे पकौड़ी तलते हैं वैसे तल ले काली पड़ने पर उनको अच्छी तरह से झार कर तेल को छानकर रख लें सुबह शाम सोते समय इस तेल को पूरे शरीर पर विशेष रूप से हाथ, पैर, कान, चेहरा आदि पर लगाएं इस तेल की गंध से मच्छर पास में ही नहीं आएंगे बदन को भलीभांति ढक कर रखें ताकि मच्छर काट न सके। 
2. नीम की पत्तियों को सुखाकर उन सूखी पत्तियों को जलाकर पूरे घर में धूआ करें इससे मच्छर भाग जाएंगे या मर जाएंगे।
3. कूलर, एसी, पानी की टंकी नाली, घर में या आसपास में कहीं पर भी यदि गंदगी हो तो उसकी सफाई का विशेष ध्यान रखें।
4. कूलर, ए .सी. का प्रयोग बिल्कुल बंद कर दें क्योंकि इनके आसपास मच्छर अधिक मात्रा में रहते हैं और इस मौसम में इनका प्रयोग करने से मौसमी बीमारियों से पीड़ित हो जाते हैं।
5. रात को हल्की हल्की गुलाबी सर्दी पड़ने लग गई है इसलिए ओढकर करके सोए।
डेंगू, मलेरिया होने की स्थिति में चिकित्सा हेतु औषधि प्रयोग:-
1. पपीता के 3 पत्ते, तुलसी की 5 पत्ती, गिलोय डंठल 4 इंच, काली मिर्च पांच नग, सौठ चूर्ण चौथाया चम्मच, इनका क्वाथ या रस निकालकर पीये।
2. गिलोय घनवटी, महासुदर्शन घन वटी दो-दो गोली कैप्सूल आयुष 64 सुबह शाम उपरोक्त क्वाथ या रस के साथ ले।
इसके अलावा सितोपलादि चूर्ण गोदंती भस्म, मुलेठी, बाल सुधा शुभ्रा भस्म, त्रिभुवन कीर्ति रस
3. बकरी का दूध पीना है।
4. अनार, चुकंदर, अंजीर, पालक, आंवला, काली गाजर, आदि का जूस बार-बार में ले।
5. पानी उबालकर ठंडा किया हुआ पिए

बचाव एवं फैलाव को कैसे रोके
डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया आदि रोग, विषाणु जनित है मच्छरों के द्वारा इनका व्यापक रूप से फैलाव है इसलिए सर्वप्रथम घर में, ऑफिस में, सार्वजनिक स्थलों पर जहां पर भी पानी इकट्ठा होता है पानी का फैलाव अधिक है जैसे कूलर ए सी, पुराना कबाड़, टायर आदि इनमें बरसात का पानी रहता है इससे मच्छर अधिक फैलते हैं सबसे पहले बरसातमे या उसके बाद इनकी सफाई करना अनिवार्य है क्योंकि जिस कारण से मच्छर फैलते हैं उस कारण को पहले समाप्त करना जरूरी है आयुर्वेद का सिद्धांत यह भी यही है कि जिस कारण से रोग उत्पन्न होता है उस कारण को पहले समाप्त किया जाए
इस मौसम में विशेषकर ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, बासी भोजन, दिन में सोना, दूषित जल, बाहर सोना, दही, ठंडी हवा, आदि से विशेष रूप से परहेज रखना चाहिए। यह भी मौसमी बीमारियों में विशेष रुप से कारण है।
इस प्रकार यदि हम आयुर्वेद के सिद्धांतों एवं आयुर्वेद के मतानुसार हम हमारी जीवन शैली को अपनाएंगे आयुर्वेद की निर्दोष निरापद औषधियों का सेवन करेंगे तो निश्चित रूप से सब तरह की बीमारियों से बचते हुए स्वस्थमय जीवन व्यतीत करेंगे। कोई भी औषधि लेने से पूर्व चिकित्सक की सलाह अवश्य लें

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