नीमकाथाना@निकटवर्ती ग्राम पंचायत हसामपुर में रात के समय आबादी क्षेत्र में भोजन पानी की तलाश में मादा पैंथर एवं उसके दो बच्चे घूमते हुए दिखाई देते हैं, जिसकी सीसीटीवी कैमरे में फोटो भी कैद है। हसामपुर के लोगों ने भी बताया कि रात के समय कई बार मादा पैंथर के बच्चे घरों में घुसकर दरवाजा खोलने की कोशिश करते हैं जब दरवाजे पर खटखटाने की आवाज सुनाई देती हैं तो बाहर झांक कर देखते हैं तो मादा पैंथर के बच्चे जाते हुए दिखाई भी देते हैं। 6 जून को इस मादा पैंथर ने हसामपुर के तीन लोगों को घायल कर दिया था जो अभी भी बेड रेस्ट कर रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों  द्वारा जयपुर से रेस्क्यू टीम को बुलवाकर इनको रेस्क्यु करवाना चाहा परन्तु रात में अंधेरे का फायदा उठाते हुए यह मादा पैंथर खंडर से निकल कर पहाड़ी पर चली गई। जिस कारण रेस्क्यू टीम  भी मादा पैंथर को रेस्क्यू नहीं कर सकी। पैंथर पहाड़ी पर चली जाने से रेस्क्यू टीम को भी दुसरे दिन बैरंग लौटना पड़ा। राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के पूर्व सदस्य और संपादक सलीम खां फरीद निवासी हसामपुर ने 2 दिन पहले वन विभाग के सबसे बड़े अधिकारी जी. विश्वनाथ रेड्डी को ईमेल से और उनके कनिष्ठ अधिकारी पवन कुमार उपाध्याय को फोन पर बात करके अवगत करवाया तथा मुख्यमंत्री कार्यालय में भी ईमेल के माध्यम से मैसेज भेज कर मादा पैंथर को रेस्क्यु कर वन क्षेत्र में छोड़ने की मांग की थी। इतना सब कुछ करने के बावजूद भी अभी तक हसामपुर गांव की आबादी में यह मादा पैंथर अपने दो बच्चों के साथ भोजन पानी की तलाश में आबादी में घूमती हुई देखी गई है। तीन लोगों को घायल करने के बाद मादा पैंथर का उग्र रूप होने से आमजन मैं भय व्याप्त है वही लोगों को जान का खतरा भी नजर आने लगा है। अगर वन विभाग के अधिकारियों ने मादा पैंथर एवं उनके बच्चों को रेस्क्यू नहीं किया तो अवश्य ही कोई जनहानि हो सकती है। क्षेत्रीय वन अधिकारी नरेंद्र कुमार सैनी ने भी माना है की मादा पैंथर ने उग्र रूप धारण कर रखा है, उसके लिए रेस्क्यू टीम बुलाई गई थी परंतु रात के अंधेरे का फायदा उठाकर यह मादा पैंथर पहाड़ों में चली जाने से इसको रेस्क्यू नहीं किया जा सका।