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द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट की जांच कराएगी गहलोत सरकार

जयपुर- राजस्थान में भाजपा सरकार के बदलने के साथ ही अब जयपुर शहर की प्रमुख परियोजनाओं में से एक द्रव्यवती नदी सौन्दर्यीकरण परियोजना के घटिया निर्माण से लेकर परियोजना के आसपास की जमीनें कार्यकारी कंपनी को देने सहित अन्य पहलुओं की कांग्रेस सरकार समीक्षा करेगी। इसके लिए राजस्थान सरकार इसकी जांच भी कराएगी।

शहर के ड्रीम प्रोजेक्ट द्रव्यवती नदी परियोजना में हुए करप्शन को लेकर कांगे्रस के जिलाध्यक्ष एवं सिविल लाइंस से नवनिर्वाचित विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास ने कई बार आंदोलन किए और प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर घोटाला बताया था। अब कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद खाचरियावास ने कहा कि प्रोजेक्ट में हो रहे करप्शन को लेकर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी थी और इसमें बड़े स्तर पर करप्शन हुआ।

आमजन का पैसा भाजपा सरकार ने पानी की तरह बहाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब सत्ता में आई है तो परियोजना में होने वाले भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग भी फिर से उठी है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट में हुए घटिया निर्माण की पोल बरसात के दिनों में ही खुल गई थी जब जगह-जगह कार्य क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन भाजपा सरकार इसको लेकर गंभीर नहीं हुई और कार्य निरंतर जारी रखा।

खाचरियावास ने कहा कि अब कांग्रेस सत्ता में आई है और कंपनी के साथ हुए एमओयू की समीक्षा की जाएगी। एमओयू में जेडीए को होने वाले नुकसान की समीक्षा कर इसमें किए गए घोटाले को कांग्रेस सरकार उजाकर कर आम जनता के बीच लाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने आम जनता के पैसे को पानी की तरह बहाकर कंपनी को फायदा पहुंचाया था।

1676 करोड़ की योजना

अहमदाबाद की साबरमती नदी की तर्ज पर तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शहर के बीचों बीच बहने वाले 47 किलोमीटर लंबे गंदे अमानीशाह नाले को द्रव्यवती नदी के सौन्दर्यीकरण परियोजना में तब्दील करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में टाटा कंपनी को 1476 करोड़ रुपए का जेडीए के साथ एमओयू कराया। इसके साथ ही कंपनी को दस साल तक इसके रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष 20 करोड़ के हिसाब से दो सौ करोड़ का भी प्रावधान किया।

दो साल में पूरा करना था प्रोजेक्ट

कंपनी को दो साल में प्रोजेक्ट पूरा करना था, लेकिन कंपनी निर्धारित समय में इसका कार्य नहीं कर पाई और जेडीए की ओर से कंपनी को एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन दिए गए और अभी तक कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। इसके साथ ही कंपनी ने 16 किलोमीटर का कार्य पूरा कराने का दावा करते हुए दो अक्टूबर को बदबूदार पानी में नाव चलाकर आधे-अधूरे कार्य के बीच इसका लोकार्पण करा दिया, जबकि लोकार्पण के दूसरे दिन से ही कंपनी ने यहां काम शुरू किया था और अभी तक इस क्षेत्र में कंपनी कार्य कर रही है।