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नगर परिषद द्वारा मुख्यमंत्री शहरी जन कल्याण शिविर अभियान में 31 दिसंबर तक जारी किए जा सकेंगे पट्टे

51 दिन बाद परिषद को वापस मिला पट्टे जारी करने का अधिकार, लेकिन सिर्फ 31 दिसंबर तक, परिषद के पास 1500 लंबित पट्टे देने के लिए सिर्फ 4 दिन

हले पट्टे जारी करने का अधिकार यूआईटी को दे दिया गया था...

सीकर नगर परिषद से छीना गया पट्टे जारी करने का अधिकार 51 दिन बाद परिषद को एक बार फिर वापस दे दिया गया। इससे 1500 लंबित फाइलों सहित शहर के करीब 2800 परिवारों को फायदा हो सकता है। लेकिन पट्टे जारी करने के लिए सरकार द्वारा परिषद को सिर्फ सात दिन का वक्त दिया गया है। जो 31 दिसंबर को पूरा हो रहा है। इसमें भी खास बात यह है कि 25 दिसंबर को क्रिसमस की और 30 व 31 दिसंबर को शनिवार-रविवार की छुट्टी है। ऐसे में परिषद के पास लंबित पट्टों के फाइल निपटाने के लिए सिर्फ चार ही दिन हैं।

उलझन : जिस कृषि भूमि पर 90ए या 90बी की कार्रवाई परिषद द्वारा की गई, उन्हीं पर जारी हो सकेंगे पट्टे 

आदेश में बताया गया है कि जिन कृषि भूमि की 90ए या 90बी की कार्रवाई नगर परिषद द्वारा की गई है, ऐसी भूमि पर मुख्यमंत्री शहरी जन कल्याण शिविर अभियान केतहत 31 दिसंबर तक परिषद ही पट्टे जारी करेगी। सरकार द्वारा परिषद को दी गई राहत में एक उलझन भी है। क्योंकि इस छूट में सिर्फ उसी जमीन पर पट्टे जारी किए जा सकेंगे, जहां परिषद पूर्व में 90ए या 90बी की कार्रवाई कर चुकी है।

लेकिन शहर की करीब 40 कॉलोनियां ऐसी है। जिनके मास्टर प्लान परिषद द्वारा तैयार कर लिए गए। लेकिन सरकार के स्तर पर लंबित है। इस छूट का फायदा उन कॉलोनी वासियों को नहीं मिल पाएगा। क्योंकि बिना लेअाउट मंजूरी के पट्टे जारी नहीं किए जा सकते।

इन कॉलोनियों में अंबेडकर नगर, चूरू-झुंझुनूं रेल लाइन के बीच बसी कॉलोनियां, जगमालपुरा रोड से झुंझुनूं, रेल लाइन, सबलपुरा तक पूर्वी सीमा में बसी कॉलोनियां, खटिकान प्याऊ से सबलपुरा व भैरूपुरा रोड तक आने वाली कॉलोनियां, शिव कॉलोनी, मोहल्ला रोशनगंज, हुसैनगंज, नेहरू पार्क के पीछे का इलाका, सालासर रोड, इंद्रा अस्पताल के पीछे का इलाका, मोहल्ला इस्लामपुर क्षेत्र, झुंझुनूं बाइपास सेपश्चिमी क्षेत्र की कई कॉलोनियां शामिल है।

यूं मिल सकता है 2800 लोगों को पट्टा 

नगर परिषद और यूआईटी क्षेत्र में 41000 से ज्यादा मकान है। परिषद स्तर सेअब तक कृषि भूमि और स्टेट ग्रांट श्रेणी के17600 पट्टे किए जा चुके हैं। परिषद में करीब 1500 पट्टे की फाइलें अब भी लंबित पड़ी है। करीब 1300 से ज्यादा लोगों ऐसे हैं। जो 90ए या 90बी की जा चुकी जमीन पर बसे हुए हैं। लेकिन पट्टे नहीं बनवाए। ऐसे में परिषद स्तर करीब 2800 लोगों को और पट्टा दिया जा सकता है।

आदेश मिलते ही परिषद ने जारी की 200 फाइलों की आम सूचना

 परिषद पट्टे का अधिकार हाथ से नहीं जाने देना चाहती। इसलिए परिषद के अधिकारी, सभापति और अन्य जिलों के विधायक लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए थे। परिषद द्वारा फाइलें भी तैयार कर ली गई। जिन पट्टे जारी किए जा सकते हैं। 22 दिसंबर को मुख्यालय से आदेश जारी होते ही  परिषद ने 200 फाइलों आपत्ति के लिए आम सूचना जारी कर दी।

क्या है 90 ए की कार्रवाई ?

किसी स्थानीय निकाय द्वारा कृषि भूमि को आबादी क्षेत्र घोषित करते हुए जमीन की निजी खातेदारी समाप्त कर रिकॉर्ड निकाय के नाम दर्ज किया जाता है। इस जमीन पर संबंधित निकाय द्वारा ही पट्टे जारी किए जाते हैं। 90ए की कार्रवाई परिषद दो स्तर पर करती है। इसमें बसावट हो चुके इलाके में सविवेक या कॉलोनाइजर के आवेदन पर यह प्रक्रिया की जाती है।

नगर परिषद ने नहीं लौटाई थी फाइल

परिषद स्तर पर पट्टे जारी करने का अधिकार खत्म करने के संबंध में नगरीय विकास विभाग की ओर सेआदेश जारी किए गए थे। इसके तहत लंबित पट्टे के प्रकरण यूआईटी को स्थानांतरित किए जाने थे। लेकिन नगर परिषद स्वायत शासन विभाग केअधीन काम करती है।

ऐसे में उन्होंने स्वयं के विभागीय आदेश नहीं मिलने तक लंबित फाइलें यूआईटी को स्थानांतरित नहीं की। परिषद का दावा था कि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन परिषद के नाम दर्ज है। ऐसे में पट्टे यूआईटी कैसे जारी कर सकती है। अब पट्टे जारी करने का अधिकार परिषद को मिल चुका है।

पट्टे देने का अधिकार पहले यूआईटी को दे दिया गया था

नगरीय विकास विभाग द्वारा 30 अक्टूबर 2017 को सीकर सहित पांच जिलों में नगर परिषद क्षेत्र में पट्टे का अधिकार यूआईटी को दे दिया था। नगर परिषद सभापति और आयुक्त इस आदेश का विरोध करते रहे। इनका तर्क था कि पट्टे का अधिकार खत्म होने से परिषद की आमदनी का बड़ा स्रोत खत्म हो जाएगा।

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