एक पहल निखरें हमारे तीर्थ स्थल-1 

तीर्थस्थल गणेश्वर में सुविधाओं की कमी के कारण श्रद्धालुओं की संख्या लगातार कमी।

नीमकाथाना:  प्रसिद्ध तीर्थधाम गणेश्वर में हर वर्ष हजारों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन फिर भी यहां सुविधाओं की कमी खलती है। गणेश्वर में सावन माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर उमड़ते हैं। इसके बावजूद ये मूलभूत सुविधाओं से परे है ।

गणेश्वर : मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं, हर ओर गंदगी का ढेर, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाघर तक नही

चहुंओर गंदगी ने पाँव पसार रखे हैं। एक दो मोबाइल कंपनी को छोड़कर अन्य कोई टावर तक नहीं है। इससे श्रद्धालु कनेक्टिवटी में काफी परेशान होते हैं। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या बनी रहती है। इसे लेकर न तो प्रशासन गंभीर है और न ही जनप्रतिनिधि।

पवित्र गालव कुंड की सफाई भी भामाशाह करवाते हैं। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री राजे के सालावाली दौरे के दौरान लोगों को गणेश्वर के विकास की आस बंधी थी, लेकिन वह भी आश्वासन तक ही सीमित रह गई। मुख्यमंत्री की इस अनदेखी से ग्रामीणों में काफी रोष है।

विदेशी पर्यटक भी गालव कुंड में डुबकी लगाने आते हैं पर प्रशासन नहीं ले रहा कोई सुध

पवित्र गालव कुंड के झरने में अनवरत गर्म पानी बहता है। इसका इतिहास 400 साल पुराना है। यहां माइनस तापमान में भी गर्म पानी ही बहता है। देशभर से यहां पर्यटक कुंड में डुबकी लगाने आते हैं। इस झरने के पानी का तापमान औसत 35 डिग्री के आसपास रहता है। कंपकपाती सर्दी में लोगों को यह खूब रास आता है।


गणेश्वर पवित्र तीर्थ स्थल की प्रमुख समस्याएँ

आवारा पशु व बंदरों की समस्या: 

तीर्थधाम गणेश्वर में आवारा पशुओं के आतंक से श्रद्धालुओं परेशान रहते हैं । यहां बड़ी संख्या में मवेशी व अन्य जानवर गंदगी करने के साथ ही आवागमन को भी बाधित करते हैं।

बेसहारा गायों की समस्या बस स्टैंड से शुरू होती है जो गालव कुंड तक जारी रहती है। गालव कुंड के बाहर बने चौबारे में बकरियां व बंदर बैठे रहते हैं।

आवारा पशुओं के हमले व बंदरों के काटने से कई श्रद्धालु जख्मी हो चुके हैं। बंदर कई बार श्रद्धालुअों के हाथ से थैला व अन्य सामान छीन कर ले जाते हैं। हालांकि यहां बड़ी गोशाला है, लेकिन आवारा पशुओं की परवाह किसी को नहीं है।

पग-पग पर गंदगी के ढेर:

गणेश्वर तीर्थधाम पर बिखरी गंदगी प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान की पाेल खोल रही है। मुख्य रास्ते में कीचड़ भरा है। वहीं गालव कुंड के आसपास प्लास्टिक थैलियां, फटे-पुराने कपड़ों के ढेर लगे हुए हैं। कहने को तो यहां ग्राम पंचायत सफाई करवाती है, लेकिन हकीकत कोसों दूर है।

प्रवेश द्वार के समीप रास्ते के कीचड़ से कई बार श्रद्धालु गिर जाते हैं। यहां हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।

श्रद्धालुओं के लिए नहीं सुविधाघर:

तीर्थधाम में बने सुविधाघर नाकाफी हैं। शौचालय बदहाल हैं। श्रद्धालु खुले में शौच करते हैं। सुविधाघर में पानी की व्यवस्था नहीं है। इनमें कचरा भरा है।

👨 जनसाधारण के विचार

उपेक्षित तीर्थधाम को संरक्षण की दरकार है। जनप्रतिनिधि भी इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।
गगनगिरी महाराज 

◈ सीएम गणेश्वर के सालावाली आई, तब उन्होंने विकास का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
सुरेश गोस्वामी, ग्रामीण

प्रशासनिक अधिकारी सुध नहीं लेते। इस वजह से क्षेत्र का विकास नहीं हो पा रहा है।
बहादुरसिंह, ग्रामीण




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