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राष्ट्रपति शपथ ग्रहण समारोह दोपहर 12.15 बजे संसद भवन के सेन्ट्रल हॉल में होगा।

देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर रामनाथ कोविंद आज शपथ लेंगे। शपथ कार्यक्रम से पहले वे राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए जाएंगे। शपथ ग्रहण समारोह दोपहर 12.15 बजे  संसद भवन के सेन्ट्रल हॉल में होगा। गौरतलब है कि रामनाथ कोविंद को 65.65% वोट मिले थे। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में राज्यसभा के सभापति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, लोकसभा स्पीकर, कैबिनेट मेंबर्स, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विदेशी एम्बेसेडर्स, सांसद और भारत सरकार के प्रमुख सिविल और मिलिट्री ऑफिसर मौैजूद रहेंगे।

रामनाथ कोविंद
source- google images

आज सुबह प्रेसिडेंट रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में पहुंचेंगे। उनके साथ प्रेसिडेंट के मिलिट्री सेक्रेटरी भी मौजूद रहेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोविंद राष्ट्रपति भवन जाने के पहले राजघाट जाएंगे।  कोविंद और प्रणब मुखर्जी एक ही कार में राष्ट्रपति भवन से संसद के लिए रवाना होंगे। वहां उन्हें लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के चेयरमैन यानी उप राष्ट्रपति रिसीव करेंगे। यही उन्हें सेंट्रल हाॅल तक लेकर जाएंगे।

शपथ कौन दिलाएगा?

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस कोविंद को राष्ट्र्पति पद की शपथ दिलाएंगे। अगर किसी कारणवस् सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस नहीं आ पाते हैं तो शपथ सुप्रीम कोर्ट के ही दूसरे सबसे सीनियर जस्टिस दिला सकते हैं। आर्टिकल 56 के मुताबिक, जिस दिन राष्ट्रपति शपथ लेते हैं, उस दिन से उनका टैन्योर पांच साल का होता है। 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। नए राष्ट्रपति भाषण देंगे।

शपथ के बाद क्या होगा?
शपथ के फौरन बाद नए राष्ट्रपति अपने बॉडीगार्ड्स और सेरेमोनियल यूनिट के साथ राष्ट्रपति भ‌वन पहुंचेंगे प्रोटोकॉल के मुताबिक, नए राष्ट्रपति कोविंद को निर्वतमान राष्ट्रपति (प्रणब मुखर्जी) राष्ट्रपति भवन के स्टडी रूम में ले जाएंगे। वहां वो उनको कुर्सी पर बिठाएंगे।

43 साल में सबसे कम वोट मिले कोविंद को
रामनाथ कोविंद को 65.65% वोट मिले थे। यह 44 साल में किसी राष्ट्रपति को मिला सबसे कम वोट शेयर है। इससे पहले 1974 में कांग्रेस के फखरुद्दीन अली अहमद को 56.23% वोट मिले थे।

1984 में 404 सीटें जीतकर राजीव गांधी ने कांग्रेस की सरकार बनाई थी। तब 17 राज्यों में कांग्रेसी सरकार थी। राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और उपराष्ट्रपति वेंकटरमण भी कांग्रेसी थे। 33 साल बाद भाजपा ऐसी स्थिति में है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बीजेपी के होंगे। लोकसभा में बहुमत भी है। और 17 राज्यों में सरकार भी।

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