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सार्वजनिक Wi-Fi का इस्तेमाल मतलब निजी जानकारियों को जोखिम में डालना।

अगर किसी को फ्री वाईफाई मिले तो वह इसका फायदा उठाने से कभी नहीं चुकता। भारत देश में करीब 96 फीसद लोग सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करतें हैं सार्वजनिक Wi-Fi का इस्तेमाल करने के लिए अपनी निजी जानकारियों को बताकर जोखिम उठाते हैं। मुफ्त की वाई-फाई सेवा का लाभ वे बैंक एकाउंट को चेक करने, निजी तस्वीरों और वीडियोज को शेयर करने में करते हैं।

सार्वजनिक Wi-Fi का इस्तेमाल
                                                    source- google images

एंटीवायरस बनाने वाली सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी नॉर्टन की ‘Norton Wi-Fi Risk Report 2017’ में कहा है कि लोग अक्सर अच्छे वाई-फाई एरिया में आने के बाद खुद को इंटरनेट से कनेक्ट करने से वह रोक नहीं पाते। वाईफाई इंटरनेट यूजर का यह ऑनलाइन बिहेवियर ही उनकी निजी जानकारियों को जोखिम में डाल देता है।

करीब 19 फीसद लोगों का कहना है कि मुफ्त वाई-फाई के लिए वे अपने निजी ई-मेल और कॉन्टेक्ट को शेयर करने के लिए तैयार हैं। सिमेंटेक की कंज्यूमर बिजनेस यूनिट के कंट्री मैनेजर रितेश चोपड़ा ने एक बयान में कहा कि लोग सार्वजनिक वाई-फाई इस्तेमाल की वास्तविकता को अभी तक समझ ही नहीं पाए हैं।

अगर आप सार्वजनिक स्थान पर वाई फाई का इस्तेमाल करतें है तो कोई भी आपकी मोबाइल में पड़ी जानकारियों पर सेंध लगा सकता है। ऐसी स्थिति में इंटरनेट यूज़ करना खतरे से खाली नहीं है। क्या पता प्राइवेट वाईफाई प्रदाता कम्पनी आपकी ब्राउजिंग पर नजर रख सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सोचता है कि वह अपनी निजी डिवाइस पर जो कर रहा है वह निजी है, लेकिन असुरक्षित वाई-फाई नेटवर्क्स पर साइबर अपराधी उसे देख सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 73 फीसद भारतीय वाई-फाई एरिया में आते ही इंटरनेट से कनेक्ट कर लेते हैं।

इनमें से 19 फीसद लोग निजी ई-मेल, 35 फीसद लोग तीन मिनट का विज्ञापन, 22 फीसद लोग निजी तस्वीरें, 16 प्रतिशत लोग ऑनलाइन डेटिंग प्रोफाइल, 19 फीसद लोग कॉन्टेक्ट लिस्ट, 19 फीसद लोग निजी सोशल मीडिया प्रोफाइल का उपयोग करने और यहां तक कि उन्हें एडिट करने की इजाजत फ्री का वाई-फाई इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं।