नीमकाथाना। रेला माइनिंग जोन में दो दर्जन खाने चेजा पत्थर की स्वीकृत है खान मालिकों द्वारा भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री से ब्लास्टिंग की जा रही है ऐसे में रेला माइनिंग जोन के आसपास के मकानों में दरारे तक आ गई है तथा कभी भी बड़ा हादसा घट सकता है। रेला निवासी पूर्व वार्ड पंच इंद्राज गुर्जर ने बताया कि भारी ब्लास्टिंग के धमाकों से पूर्व में भी कई मकानों की पटिया टूट गई है। गाय भैंस दूध देने से चली गई , जंगल में पशु पक्षियों की मौतें हो रही है। मंगलवार को भारी ब्लास्टिंग के कारण स्कूल भवन की पटिया टूट गई इसको लेकर पूर्व में भी कई बार स्थानीय प्रशासन को अवगत करवाया गया परंतु खनन मालिकों के संबंध नेताओं से होने के कारण हम लोगों की शिकायते फाइलों में बंद हो जाती है।माइनिंग जॉन के पास रेला बांध का केचमेंट एरिया पर भी खनन मालिकों ने ओवरबर्डन डालकर अपने कब्जे में कर लिया है। रेला बांध की दीवार भी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।रेला माइनिंग जोन में जाने वाली सड़क कच्ची होने से पूरे दिन इस सड़क पर धूल धुआं उड़ती रहती है जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रही है। इंद्राज गुर्जर ने यह भी बताया कि बहुत से खान मालिकों के पास हैवी ब्लास्टिंग का लाइसेंस भी नहीं है उसके बावजूद भी ये सभी खान मालिक  भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मंगवा कर ब्लास्टिंग कर आम  जनजीवन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।खान मालिक सभी कानून कायदों को ताक में रखकर खनन करने से माइनिंग जॉन के पास रह रहे लोग खान मालिकों  एवं प्रशासन के खिलाफ आक्रोशित है।
क्षेत्र में विस्फोटक अधिनियम की उड़ रही है धज्जियां---विस्फोटक अधिनियम के तहत जो भी विस्फोटक सामग्री लाने वाला वाहन जिसमें विस्फोटक सामग्री एवं अपने रूट चार्ट की संपूर्ण जानकारी संबंधित पुलिस थाने को देता है ताकि क्षेत्र में कोई बड़ी दुर्घटना ना घटे। परंतु यहां पर सब कुछ विपरीत होता है विस्फोटक सामग्री लाने वाले वाहन अपनी कोई भी जानकारी नहीं देते हैं तथा दिन में कई बार इन वाहनों को कस्बे एवं गांवों  की सड़कों पर देखा जा सकता है।
दूषित पर्यावरण से लोगों के स्वास्थ्य के साथ हो रहा है खिलवाड़---रेला माइनिंग जॉन हो या देई माई, किशोरपुरा, मीणा की नांगल, रायपुर मोड माइनिंग जोन हो वहां दिनभर धूल धूंआ उड़ने से आमजन परेशान रहता है। पूरे दिन इन इलाकों में धूल के गुब्बारे उड़ते रहते हैं कथा हर व्यक्ति मिट्टी फांकने को मजबूर हो रहा है।पर्यावरण विभाग भी कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है, ऐसे में अधिकांश लोग अस्थमा, दमा, सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। विगत 3 दिसंबर को खान के नजदीक ही बने मकान में एक वृद्ध की सिलिकोसिस जैसी गंभीर बिमारी के कारण मौत भी हो गई है।

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