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शहद हजारों साल बाद भी खराब नही होता: 

शहद जो कि मधुमक्खी द्वारा पचाया गया व एकत्रित किया गया उनका अपना भोजन होता है इंसान के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है तथा महंगा भी। इसीलिए ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन आमदनी का एक स्त्रोत है। पर क्या आप जानते हैं कि हज़ारों वर्ष पश्चात भी शहद खराब नही होता यह तथ्य उस समय सच साबित हो गया जब इजिप्ट के पिरामिडों में एक बादशाह (फैरो) की कब्र से शहद निकला जो कि हजारों साल पुराना था जब यह शहद खोजी वैज्ञानिको द्वारा चखा गया तो उन्होंने पाया कि इसके स्वाद में किसी भी तरह का कोई अन्तर नही था यद्दपि वर्षो तक पड़ा रहने के कारण यह ठोस हो गया था तथा इसे गर्म करने की आवश्यकता थी।

➧ पेन्सिल की लिखने की क्षमता: आप जो पेन्सिल प्रयोग करते हैं उनमें से औसतन की लम्बाई एक समान होती है तथा बीच में एक लैड होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यदि आप पेन्सिल से एक विशाल कागज़ पर सीधी रेखा खींचेंगे तो इसकी लम्बाई लगभग 35 किलो मीटर होगी जो कि भारत के कुछ जिलों के मध्य बीच दूरी के समान है। इसके अतिरिक्त यदि अंग्रेजी के शब्दों में इसे गिना जाए तो लगभग 50 हजार अंग्रेजी शब्द लिख पाने की क्षमता आपकी पेन्सिल की लैड में होती है।

➧ तित्ल्लियाँ अपने पैरों से स्वाद चखती हैं: तितलियों को अपने भोजन या फूल इत्यादि के रस का स्वाद महसूस करने के लिए सिर्फ उस पर खड़ा होना होता है क्योंकि उनकी स्वाद महसूस करने क्षमता उनके पैरों में होती है यही कारण है कि जब आप ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि अक्सर तितलियाँ फूलों पर बैठती हैं तथा उड़ जाती है फिर अन्य फूल बैठती हैं तथा उड़ जाती है जब तक कि उन्हें अपनी चाह के अनुसार फूल नही मिल जाता दरअसल वे अलग अलग फूलों पर खड़ी होकर उनका स्वाद देखती हैं। जब उन्हें किसी फूल का स्वाद पसंद आता है तभी वे उसका रस चूसती हैं। इसी प्रकार ये अन्य भोजन के साथ करती हैं।

➧ अल्बर्ट आइंस्टीन के अंतिम शब्द: किसी भी बुद्धिजीवी के जीवन के अंतिम शब्द सदैव प्रेरणा का स्त्रोत बनते रहे हैं इसी तरह अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी मरने से पूर्व कुछ अंतिम शब्द कहे थे परन्तु दुर्भाग्य से किसी ने भी उनके वे शब्द नही सुने सिवाय एक नर्स के जो उनके अंतिम समय में उनके पास खड़ी थी और दुर्भाग्य की बात ये थी कि उस नर्स को जर्मन नही आती थी जिस कारण उनके वे अंतिम शब्द राज़ बन गए।

➧ हंस का प्रेम में प्राण देना: हंस जो कि सफेद रंग का एक पक्षी होता है तथा विवेक और शांत स्वभाव का प्रतीक है भी मनुष्य की भांति अपने प्रेमी की मृत्यु से दुखी होता है। कोई भी हंस अपने जीवन में दूसरा जोड़ा नही बनाता ये ही कारण है कि हंस के जोड़े में से किसी एक के मर जाने के पश्चात दूसरा साथी भी दुःख में अपने प्राण त्याग देता है।

➧ सोने तथा याददास्त में सबंध: सारा दिन काम करते रहना, कुछ ना कुछ पढ़ते रहना या कोई जानकारी हासिल करते रहना ही तेज मस्तिष्क का आधार नही है बल्कि इसके लिए आपको अपने दिमाग को आराम देना होगा। विभिन्न प्रकार के शोध बताते हैं कि जब हम निन्द्राव्स्था में होते हैं तभी हमारा मस्तिष्क ज्ञान को हमारे मस्तिष्क में संजोने का काम करता है तथा यदि हम कुछ पढने के बाद कुछ मिनट का आराम करें या नींद ले सकें तो हम किसी भी जानकारी अधिक स्पष्टता से याद रख सकते हैं व जरूरत करने पर इस्तेमाल कर सकते हैं। इतना ही नही सोना व्यक्ति की रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) को भी बढ़ाता है।

➧ बच्चे/ व्यस्क व्यक्ति दोनों की हड्डियों की संख्या में अंतर: मनुष्य के जन्म के समय शरीर में 270 हड्डियाँ होती हैं जो व्यक्ति के व्यस्क होते होते घटकर 206 रह जाती हैं। वास्तव में शरीर से किसी प्रकार की हड्डी समाप्त नही होती बल्कि कुछ हडियाँ आपस में जुड़ जाती हैं ये ही कारण है कि व्यस्क व्यक्ति की अपेक्षा एक शिशु का शरीर अधिक लचीला होता है।

➧ मच्छर द्वारा चूसा गया रक्त: जब कोई मादा मच्छर रक्त चूसती है तो इसकी अधिक से अधिक मात्रा उसके अपने शरीर के भार से लगभग डेढ़ गुना अधिक हो सकती है। अर्थात मच्छर द्वारा चूसे गए खून का भार मिलाकर मच्छर का भार पहले से ढ़ाई गुना बढ़ जाता है ये ही कारण है कि रक्त चूसने के बाद इसे तीव्रता से उड़ने में परेशानी होती है इसी कारण रक्त चूस चुके मच्छर को आसानी से मारा जा सकता है।

➧ इन्सान के मरने पर सबसे पहले व सबसे बाद में नष्ट होने वाली ज्ञानेन्द्रियाँ: मनुष्य की मृत्यु होते ही उसकी सभी ज्ञानेन्द्रियाँ एक साथ नष्ट नही होती बल्कि सभी के नष्ट होने में कुछ समय लगता है। सर्वप्रथम मनुष्य की दृष्टि व छूअन को महसूस करने की क्षमता नष्ट होती है अर्थात मरने की क्रिया में शरीर के सून पड़ने जैसी स्थिति होती है तथा कुछ भी दिखाई नही देता। इन सब के विपरीत सुनने की क्षमता सबसे अंत में नष्ट होती है इसी कारण मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक मनुष्य को सुनाई देता है।

➧ विद्यालय की बसों का रंग पीला होने का कारण: आपने देखा होगा कि विद्यालय की बसों का रंग ज्यादातर पीला होता है यद्दपि ज्यादातर बुद्धिजीवियों को इसका कारण पता होगा लेकिन फिर भी आपको बता दें कि मनुष्य का मस्तिष्क पीले रंग के प्रति अधिक संवेदनशील होता है तथा छोटे बच्चे जो कि ध्यान केन्द्रित कर पाने में इतने सक्षम नही होते के लिए बसों का रंग पीला होता है ताकि बच्चों का मस्तिष्क उनका ध्यान बस की ओर केन्द्रित करने में सहायता कर सके।

➧ बिल गेट्स की दौलत: दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार माइक्रोसॉफ्ट के मालिक व संस्थापक बिल गेट्स के पास इतनी दौलत है कि अगर वे रोजाना 10 लाख रूपये भी खर्च करें तो अपनी सारी दौलत को लुटाने के लिए उन्हें 218 वर्ष लगेंगे। जो कि उनके इस जीवन में संभव नही है। यद्दपि यह एक पैमाना मात्र है तथा व्यापार में उठा-पटक के चलते यह सम्पति कम या ज्यादा होती रहती हैं।.

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