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राजस्थान: मुख्यमंत्री चुनने में 3 दिन लगे; कैबिनेट भी 12 दिन में तय और मंत्री भी अब तक बिना विभाग

जयपुर- राजस्थान में कांग्रेस को सत्तासीन हुए 15 दिन बीत चुके हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की शपथ के बाद 13 कैबिनेट और 10 राज्य मंत्रियों ने भी 72 घंटे पहले शपथ ले ली।

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यहां तक कि मंत्रियों को कक्ष भी बांट दिए गए हैं, लेकिन अभी तक उनके विभागों का अता-पता नहीं है। इसकी असली वजह ये है कि टिकट बंटवारे से लेकर सीएम की नियुक्ति, कैबिनेट चुनने और उनके विभागों के बंटवारे सहित तमाम मसले दिल्ली में ही तय हो रहे हैं। वहीं, पिछले आठ दिन में ही 140 से ज्यादा अफसरों को इधर-उधर किया जा चुका है।

क्या विभाग तय करवाने दिल्ली गए गहलोत?
उम्मीद है कि आज विभाग बांट दिए जाएं
26 दिसंबर : मुख्यमंत्री गहलोत बुधवार दोपहर अचानक दिल्ली रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि मंत्रियों के विभागों का फैसला करवाने के लिए दिल्ली गए।

इसी वजह से मंत्रियों के विभागों की सूची लगभग तय होने के बावजूद राज्यपाल को नहीं भेजी गई।
दूसरी तरफ मंत्रियों को कक्ष तो बांट दिए गए हैं लेकिन विभागों का अता-पता नहीं है। उम्मीद है कि गुरुवार को मंत्रियों को पोर्टफोलियो मिल जाएंगे।

15 दिन में इस तरह आगे बढ़ी सरकार
  • 11 दिसंबर : चुनाव का परिणाम घोषित।
  • 17 दिसंबर : दिल्ली से चेहरा तय होने के बाद सीएम-डिप्टी सीएम ने शपथ ली।
  • 18 दिसंबर : 40 आईएएस, 8 आरएएस बदले, तीन आईएफएस के तबादले, सीएमओ में अदला-बदली की।
  • 20 दिसंबर : 17 आईपीएस बदले गए।
  • 21 दिसंबर : सीएम के आर्थिक सलाहकार एवं सलाहकार नियुक्त किए गए।
  • 24 दिसंबर : 23 मंत्रियों ने शपथ ली।
  • 25 दिसंबर : 33 में 30 कलेक्टर बदले।
मुख्यमंत्री व कैबिनेट भी दिल्ली से ही तय
16 दिसंबर : अशोक गहलोत और सचिन पायलट दिल्ली में राहुल गांधी से मिलने पहुंचे। यहां से निर्देश मिलने के बाद 17 दिसंबर को शपथ ग्रहण की। इसी बीच 108 आईएएस के तबादले हो गए। 17 आईपीएस भी बदले गए।
23 दिसंबर : मंत्रियों की सूची फाइनल करने के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट दिल्ली पहुंचे। वहां के निर्देशन में 24 दिसंबर को 13 कैबिनेट और 10 राज्य मंत्रियों को शपथ ग्रहण कराई गई।

यहां क्यों नहीं सुलझते मसले

राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सीएम का चेहरा घोषित नहीं किया। सचिन पायलट और अशोक गहलोत दोनों सीएम के दावेदार थे। इसमें गहलोत बाजी मार ले गए और पायलट को डिप्टी सीएम बनाया गया। यह मामला सुलझा तो दोनों कैंपों में अपने पसंदीदा विधायकों को मंत्री बनाने को लेकर पेच फंस गया। मामला फिर दिल्ली पहुंचा। मंत्रियों के नाम तय हो गए... शपथ हो गई तो अब अपने लोगों को पसंदीदा विभाग दिलवाने के लिए खींचतान चल रही है।