पाटन @  ये है पाटन। ऐतिहासिक कस्बा। चहुंओर वादियां। हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य ऐसा कि हर किसी का मन मोह लें। बारिश के दिनों में तो यहां की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। पाटन सीकर जिले के नीमकाथाना के पास स्थित है। स्थानीय लोग और देशी पर्यटक ही नहीं बल्कि विदेशी भी इस जगह के कायल हैं।


पाटन मंडल मुख्य शहर नीम का थाना और अपने जिला मुख्यालय सीकर से 81.9 किमी दूरी से दूर 17.6 किमी दूर है. यह अपने राज्य की राजधानी जयपुर से 100 किमी दूर स्थित है। पाटन के आसपास के गांवों में (4.6 किमी) डोकण , रायपुर पाटन (7.7 किमी), जीलो (8.4 किमी), बिहार (8.7 किमी), और हसामपुर (8.7 किमी) हैं. पाटन के आसपास के शहरों में   नीम का थाना (17.6 किमी), खंडेला (50 किलोमीटर), श्री माधोपुर (53.7 किमी), और पिपराली (70 किमी) हैं. यदि इतिहास में झांकने का प्रयास करेंगें तो पाएंगें कि ‘पाटन’ राजस्थान राज्य का एक प्राचीनतम गावों में से एक गांव है।



 12 वीं सदी में यह एक छोटी सी रियासत तंवरावाटी या तोंरावाटी कहा जाता था। राज्य का केंद्र (मुख्यत: तंवर/तोमर के नाम से राव अनंग पाल तोमर के वंश से प्रत्यक्ष माना जाता है)।

पाटन ग्राम मुख्यत: तीन पहाड़ों (स्थानीय भाषा में डूंगर) के बीच कभी आबाद था। जिसके दाहिने दो पहाड़ बाएं एक पहाड़ जिनके मध्य में एक काफी उंचा पहाड़  इस प्रकार स्थित है जैसे कि एक विशालकाय ऋषि ध्यान अवस्था में विराजमान हो, बीच वाले प्रमुख पहाड़ की चोटी पर एक भव्य- विशाल किला देखा जा सकता है मानो आज भी शत्रु को लल्कार रहा हो कि “पाटन पर हमला करने का दुसाहस तो करो मैंने पूरे गांव को चारों ओर से  परकोटे से सुरक्षित कर रखा है।"

यदि किसी ने इस सुरक्षा घेरे को भेद कर गावं में प्रवेश करने का प्रयास किया तो किले से भवानी तोप गरजना आरम्भ कर  देगी.” (आज भी परकोटे के कहीं-कहीं खण्डहर देखे जा सकते हैं) यद्यपि भवानी तोप आज नदारद  है उसकी केवल उपमाएं हैं, दंत कथाएं हैं, कहानियां हैं।

किले की वास्तु कला राजस्थान के अन्य प्रसिध्द किलों की भांति ही पत्थर व चूने से निर्मित है, जिस की ब्रुजों पर दिपावली-होली, दशहरा जैसे पर्वों पर कभी मशालें जलाईं जाती थीं, उक्त मशालें कई दिनों तक सरसों के तेल में डुबा कर रखे गए भैंफोड़ से प्रज्जवलित की जाती थीं।



इस किले में हिंदु राव राजाओं की आस्था का प्रतीक एक हनुमान मंदिर भी था, शेष किले में इतना स्थान था कि पर्याप्त हाथी घोडे व असलहे के अतिरिक्त एक अच्छी खासी संख्या में सैनिक भी निवास करते रहे होंगें. इतनी उंचाई पर आवागमन के साधन मात्र हाथी-घोड़े ही थे या  फिर मानव शक्ति जिसके निमित गंज के खुरे से  मुख्य  द्वार, नीलगरों का मोहल्ला से लेकर दासों के मोहल्ले से होते हुए उपलाड़ी महल और फिर किले तक ढलवां चिकने  पत्थरों से निर्मित की गई एक पक्की सड़्क भी निर्माण की गई थी जिसकी चौड़ाई इतनी थी कि सम्भवत: दो–दो हाथी एक साथ आ-जा सकते  थे।

पहाड़ पर स्थित ब्रुज के ठीक नीचे जो खण्डह्रर आज भी  मौजूद हैं वहां हमारे पूर्वज निवास करते थे। जबकि महलों के नीचे कर्मचारियों के निवास थे।  बाईं तरफ पहाड़ पर जोशी, लाला (कायस्थ) और हाथी व महावत तथा उनके घरों के नीचे थोड़ी दूरी पर घुड़्साल और साईस निवास करते थे। नीचलाड़ी महल निर्मित होने के कुछ ही वषों पूर्व वर्तमान दास मुहल्ला बसाया गया था”।

शेष भूखण्ड पर दासां वाले कुएं से लेकर खुर्रा और  उसके नीचे (वर्तमान बानियों की घरों तक दास परिवारों को मकान बनवा कर दिए गए कालांतर में दास परिवार खुरे के नीचे से लेकर वर्तमान में स्व.मूंगला बानिया तक और कुछ घर बसाए गए।

यद्यपि प्राचीन  राम मंदिर के सम्मुख स्थित उपलाड़ी पाटन का भव्य  मुख्य दरवाजा वर्तमान में लुप्त चुका है जिस स्थान को  स्थानीय निवासियों द्वारा कुछ भवन निर्मित किए जा चुके हैं।

इस द्वार के बीचों -बीच दोनों तरफ सुन्दर मेहराब बने थे  बैठने का, विश्राम करने का उपयुक्त और अच्छा स्थान था जहां 10-20 लोग आराम से बैठ सकते थे।  पाटन गांव के ऊपर  बीच वाले पहाड़ पर एक प्राचीन रमणीय महल है, जिसकी वास्तुकला विशुध्द हिंदू वस्तुकला है,  यह मध्यकाल में निर्मित हुआ होगा प्रतीत होता  है.

जिसे सुदूर-गावं की बाहरी सीमा से भी देखा जा सकता है, यद्यपि काल के गाल में यह अपने ह्रास की ओर तीव्र गति से अग्रसित  हो रहा है, जिसके शायद दो  कारण रहे  हैं; (अ) इसका प्राचीन होना (ब) दूसरा विगत वर्षों मे अज्ञात खजाने की खोज में  खुदाई/तोड़-फोड़ किया जाना। इससे इसका सुन्दर् रुप अवश्य विकृत हो गया।

पाटन ग्राम एक अति प्राचीन धार्मिक स्थान भी है जहां देईमाई माता का मंदिर पाटन डाबला रोड पर, जोहड़ा की पाल पर स्थित तोतला माता का मंदिर, शिव मंदिर,गंज का राम मंदिर, दासों का ठाकुरजी  का मंदिर,  दास मुहला के उपर पश्चिम में दो पहाड़ों के बीच प्रसिद्ध चिरका  घाटीवाले हनुमान जी का मंदिर, पहाड़ की चोटी में स्थित  किले में भी हनुमान जी का मंदिर, श्यामीकुटी का मंदिर,बावड़ी दरवाजा अर्थात गांव के मुख्य द्वार पर स्थित हनुमान जी का मंदिर और कोट्पूतली की ओर जानेवाल मार्ग पर बाईं ओर  शमशान घाट निकटस्थ श्री श्री हरबाई माता का प्रसिध्द व  प्राचीन जैसे भव्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।

जब बात हो पाटन के शौर्य और देशभक्ति के जज्बे की तो नायक शहीद कल्याण सिंह का नाम गर्व से लिया जाता है। शहीद कल्याण सिंह ने कारगिल युद्ध में पांच गोली खाकर भी तीन आतंकियों को ढ़ेर कर दिया था।

पाटन गांव में एक पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज श्रीमती आशा देवी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के नाम से स्थित है. यहां पर जवाहर नवोदय विध्यालय की शृखला के अंतरगत एक विध्यालय जिसकी स्थापना सन 1985 में की गई थी स्थित है। हाल ही में पाटन को सरकारी कॉलेज की सौगात मिली है। जिससे अब विद्यार्थियों को यहां से 25 किलोमीटर दूर कोटपूतली तथा नीमकाथाना अध्ययन के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

लेखक- राजकुमार चनानियाँ
             पाटन नीमकाथाना 

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