Update Your App Now

News Update

प्रीतमपुरी एक परिचय एवं इतिहास | History Of Pritampuri

प्रीतमपुरी एक रिचय एवं तिहास

शेखावाटी की ह्रदयर्स्थली सीकर, सीकर से 80 किमी. पूर्व में नीम का थाना तहसील मुख्यालय से लगभग 20 किमी. की दुरी पर 27`35`40 14 उत्तरी अक्षांश से 75`45`08`74 पूर्वी देशांतर पर अरावली की गोद में प्रीतमपुरी नामक ग्राम स्थित है। इतिहास में भारतमाता के गरिमामय वैभव प्राकृतिक संपदा एवं जन के र्ह्द्य पर उत्कीर्ण अस्मिता की रक्षार्थ वीरों की गाथाओं का पर्याप्त उल्लेख मिलाता हैं। 

प्रीतमपुरी एक परिचय एवं इतिहास

गाँव के नामकरण के बारें में कहा जाता है कि पिथो नामक व्यक्ति के नाम पर पिथामपुरी थुपरी से शुद्ध होता हुआ कालांतर में प्रीतमपुरी पड़ा। गाँव कि स्थापना लगभग 1250 ईस्वीः सन के आसपास बताई जाती है।

पहाड़ी वाले बालाजी कि गोद में स्थित प्रीतमपुरी कि आबादी 20,000 है ,अरावली कि उपत्यका में सात किलोमीटर लम्बी व पांच किलोमीटर चौड़ी सीकर जिले की प्रसिद्ध झील इसी गाँव में स्थित है ,जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी रहती है साथ में कृषि सिचाईं का भी सशक्त माध्यम है।

धार्मिक नगरी प्रीतमपुरी 

प्रीतमपूरी में पहाड़ी वाले बालाजी की लोगों में विशेष मान्यता है। लोग मनोकामना की पूर्ति हेतु मंदिर में खींचे चले आते हैं। शाम के समय में यहाँ अनुपम माहौल बन जाता है। पूजा के समय अगरबत्ती व धुप बत्ती की मनमोहक खुसबू यहाँ चारों और हवा में फैलकर वातावरण को और भी भक्तिमय बना देती है।

प्रीतमपुरी झील...

कांतली नदी खंडेला के निकट प्रीतमपुरी झील का निर्माण करती है। यह नदी प्रीतमपुरी व खंडेला की पहाड़ियों से निकल कर झुंझनू में अन्तर्निहित हो जाती है। इसका बहाव क्षेत्र तोरावाटी कहलाता है। कहा जाता है कि पहले प्रीतमपुरी झील में उत्तम किस्म के नमक का उत्पादन होता था, लेकिन अब यह झील प्रशासन की उपेक्षा के दंश झेल रही है।

प्रीतमपुरी गाँव का भौतिक परिवेश...

प्रीतमपुरी गाँव के भौतिक परिवेश पर नज़र डाले तो विदित होता है कि ग्राम्य जीवन कि शुचिता प्राकृतिक सुरम्यता व शांत निर्मल वातावरण "पावन तपोंवन" की भांति विस्तृत क्षेत्र में फेले हुये गाँव का परिक्षेत्र यहाँ आने वालें जनमानस के मन घर कर लेता है।

लोगो का भाईचारा प्रेम,सोहार्द आज भी यहाँ के जनमानस में एकता बनाये हुये है। यहाँ के प्रमुख मेलों में चेत्र कृष्ण पंचमी मास में आयोजित पहाड़ी वाले बालाजी का व जीण माता का विशाल मेला भरता है जिस में दूर दूर के श्रद्धालु अपने पुरे परिवार के साथ दर्शन करने आते है।

शिक्षा का क्षेत्र...

शिक्षा के लिये 50 पूर्व स्थापित दसवीं तक स्कूल था भामाशाहों के अथक प्रयास से विद्यलाय को विशाल रूप तो दे दिया गया था मगर सीनियर तक क्रमोंउन्नत करने के लिये शिक्षा मंत्री को बार बार ज्ञापन देने के बाद अब जाकर आजादी कि रोशनी में दुल्हन कि तरह इसी सत्र में ठुमक ठुमक कर इतराते हुये चलने लगा है।

अब तो इसका कहना ही क्या, आने वाले दिनों में बड़े बड़े अफसरों कि फ़ौज तैयार करेगा ,बालिका विद्धालय का अभाव भी गाँव की नियति है , इसी प्रकार परिवहन के निजी साधनों के साथ दो राजस्थान रोड़वेज की बसें भी संचालित हो रही है। इस गाँव के आसपास कुछ छोटी मोटी बस्तियाँ है जिनमे ढाणी अहिरान अमर शहीद, रामनिवास नेचु वाली, कंवरपुरा, समली ढाणी, छापर, बबेरा और ढाणी लुनिवालों की है।

➧ अपने फ्रेंड्स के साथ शेयर जरूर करें...

साथ ही डिजिटल नीमकाथाना एप भी गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें 

header ads