विज्ञापन के लिए सम्पर्क करें- +91-9079171692, +91-9680820300

News Update

नीमकाथाना की प्राचीन गणेश्वर सभ्यता के गणेश्वर कुण्ड से क्यों बहता है हमेशा गर्म पानी।

राजस्थान राज्य पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के भूतपूर्व निदेशक श्री आर. सी. अग्रवाल एवं विजय कुमार के नेतृत्व में सन 1978 से 1988 के मध्य प्राचीन गणेश्वर सभ्यता  उत्खनन हुआ। जिसमें ताम्र युगीन सभ्यता अवशेष मिले है। खुदाई के अंतर्गत मिलने वाले ताम्बे के औजारों के कारण गणेश्वर को ताम्र युगीन सभ्यता की जननी भी कहा जाता है। नीमकाथाना के पास गणेश्वर ही एक ऐसी जगह है।  जहां कड़ाके की सर्दी में गरम पानी का झरना बहता है। गणेश्वर नीमकाथाना कस्बे से 15 किमी दूर है। तापमान कितना ही गिर जाए, इस झरने के पानी का तापमान औसत 35 डिग्री के आसपास रहता है। कंपकंपाती सर्दी में लोगों को यह खूब रास आता है। देशभर से धार्मिक पर्यटक यहां आते हैं।


प्राचीन गणेश्वर सभ्यता
                                                   source- google images

गांवडी नामक गांव गणेश्वर के पास होने की वजह से गणेश्वर को "गांवडी गणेश्वर" (Ganwari Ganeshwar) भी कहा जाता है। सीकर जिले के नीमकाथाना कस्बे से लगभग 10 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत श्रंखला की सुरम्य वादियों के बीच बसे इस गांव के भवन निर्माण को देखते ही आभास हो जाता है कि यह एक प्राचीन गांव है।

सल्फर की मात्रा ज्यादा

गणेश्वर धाम में सभी देवताओं के अलग-अलग मंदिर बने है। धाम के सामने एक द्वार बना है, द्वार से प्रवेश करते ही चारों और छोटे-बड़े विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर नजर आते है। गणेश्वर कुंड में पहाड़ियों से निर्बाध पानी आता रहता है जिसमें सल्फर की मात्रा है यही वजह है कि यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु इस कुण्ड में चर्म रोग के निदान हेतु डुबकी लगाना नहीं भूलता। चर्म रोगी भी यहाँ अपने रोग का निदान करने हेतु नहाने आते है।

गणेश्वर में जगह सल्फर भारी मात्रा में है। सल्फर पानी का तापमान बढ़ा देता है। इसी वजह से झरने का पानी गरम रहता है। इस तरह प्राचीन सभ्यता, धार्मिक महत्त्व व स्वास्थ्य लाभ हेतु यह गांव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना है।


प्राचीन गणेश्वर सभ्यता
                                                     source- google images

राजकीय महाविधालय के हिस्ट्री के प्रोफेसर डा. एमएल मीना के मुताबिक इस झरने का इतिहास करीब 400 साल पुराना है। जी हाँ गलता तीर्थ से भी पुराना। यहां हड़प्पा संस्कृति के अवशेष भी मिल चुके हैं। इस गांव में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई भी की गई थी, जिसमें कई ताम्बे के पाषाण औजार मिले। चूँकि राजस्थान की खेतड़ी की तांबे की खदाने यहाँ से ज्यादा दूर नहीं है, अत: उत्खनन में इतने प्राचीन ताम्र औजार मिलने से साफ़ है कि यहाँ के निवासियों के पास प्राचीन काल से तांबा निकालने की तकनीक मौजूद थी। उत्खनन ने यह साफ़ कर दिया कि कभी यहाँ भी एक उन्नत संस्कृति, सभ्यता मौजूद थी, जो समय के थपेड़ों के साथ बनती बिगड़ती रही।

कई बार उठी तीर्थ स्थल को संरक्षण देने की मांग

गणेश्वर को सरकारी संरक्षण देकर विकास के लिए ग्रामीणों ने कई बार मांग उठाई है। देवस्थान विभाग से भी ग्रामीणों ने गणेश्वर संरक्षित कर विकास की मांग रखी। पीडब्ल्यूडी ने कुंड व गर्म जल स्त्रोत के विकास के लिए बजट जारी किया था, जो कम था। इसके अलावा रायसल सेवा समिति व ग्रामीणों के सहयोग से साफ-सफाई की व्यवस्था हो पाती है। सुविधा मिले तो गणेश्वर में देशी व विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।


Video - 


विदेशी पर्यटक रूकते हैं बालेश्वर में

गणेश्वर में विदेशी पर्यटक भी पहुंचते हैं, लेकिन वहां कोई प्रबंध नहीं होने से इनकी संख्या लगातार कम होने लगी है। गणेश्वर आने वाले विदेशी पर्यटक गणेश्वर में रूकने के बजाय बालेश्वर में रुकते हैं। यहां से नीमकाथाना के सभी प्राचीन धार्मिक स्थलों पर विदेशी पर्यटकों को ट्रेवल एजेंसी के लोग लाते हैं।

देश दुनिया के साथ साथ पढ़िए नीमकाथाना की हर बड़ी खबर केवल नीमकाथानान्यूज़.इन पर। 
हम लाये हैं आपके नीमकाथाना शहर की एकमात्र लाइव न्यूज़ वेबसाइट जो आपको रखे अप टू डेट।